लड़कियों का ‘फिगर’ बताने में CBSE ने दी सफाई, कहा हमारी कोई भूमिका…

कहा जाता है कि जो हम स्कूलों में सीखते हैं वहीं बड़े होने पर हमारे विचारों की नींव बनती है। हमारे समाज में स्कूली शिक्षा को काफी महत्व दिया जाता है। और तो और माता-पिता परीक्षाओं में मिले नंबरों को ही बच्चों के विकास का पैमाना मान लेते हैं। लेकिन पाठ्यपुस्तकों की सामग्री को लेकर भी हमेशा से सवाल उठते रहते हैं।  CBSE

सोशल मीडिया पर फिजिकल एजुकेशन की पाठ्यपुस्तक की कुछ सामग्री आजकल खूब वायरल हो रही है। दरअसल सीबीएसई के स्कूलों में पढ़ाए जाने के लिए तैयार की गई फिजिकल एजुकेशन की पाठ्यपुस्तक में 36, 24, 36, फिगर को महिलाओं के लिए परफेक्ट फिगर माना गया है। इतना ही नहीं इस बात को साबित करने के लिए पाठ्यपुस्तक में तर्क भी दिया गया है कि मिस वर्ल्ड या मिस यूनिवर्स प्रतियोगिताओं में महिलाओं की ऐसी फिगर को तवज्जो दी जाती है।  

न्यू सरस्वती हाउस द्वारा प्रकाशित इस पाठ्यपुस्तक को 12वीं क्लास में पढ़ाया जाता है हालांकि इसको सीबीएसई ने बच्चों की पढ़ाई के लिए शामिल नहीं किया है। इस पुस्तक का शीर्षक है द हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन। 

इस पुस्तक में ये भी कहा गया है कि व्यायाम फिगर को आकर्षक बनाता है। ऐसी सामग्री के सोशल मीडिया पर वायरल होने से हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था फिर से सवालों के घेरे में आ गई है। 

हालांकि इस पर सीबीएसई की तरफ से बयान आ गया है। सीबीएसई की पीआरओ रमा शर्मा ने कहा कि इसमें बोर्ड की कोई भूमिका नहीं है। इसके लिए स्कूल और किताब के प्रकाशक जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में एनसीईआरटी और सीबीएसई द्वारा प्रकाशित किताबों को ही पढ़ाया जाना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि अगर सीबीएसई से संबंद्ध स्कूलों में प्राईवेट प्रकाशन के किताबों को पढ़ाया जाता है तो इस पर पूरी तरह से सतर्कता बरतनी चाहिए। इस पर निगरानी हो जिससे धर्म, जाति या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव न हो पाए। 

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