लखनऊ के दिव्यांश सिंह ने किया तीसरी आंख का इजात, नेत्रहीन लोगों को मिलेगा नया जीवन दान

कहा जाता है भगवान शिव की जब तीसरी आँख खुल जाए तो प्रलय निश्चित है. लेकिन लखनऊ में रहने वाले एक लड़के ने एक ऐसी तीसरी आँख का इजात किया है जिससे ज्योतिहीन लोगों को एक नया जीवन दान मिलेगा. अंधेरे में जीने को मजबूर उन तमाम लोगों के लिए कक्षा 10 में पढ़ने वाले दिव्यांश सिंह ने एक ऐसे डिजिटल चश्मे को तैयार किया है जिससे वो ना केवल लोगों को सहायता प्रदान करेंगे, बल्कि परिजनों को उनकी सुचारू रूप से जानकारी भी दे पाएँगे.
इस चश्मे को बनाने के बाद, दिव्यांश को इनस्पाइर अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया है. माना जा रहा है की इस चश्मे को पहन कर दृष्टि बाधित व्यक्ति मार्केट और रोज़ मररा के कार्यों को सुचारू रूप से कर सकेंगे. इस चश्मे में कॅमरा, अल्ट्रसाउंड और सेन्सर्स इसके महत्व को और गति प्रदान करेंगे.
बचपन से ही विज्ञान में रूचि रखने वाले दिव्यांश को बहुत कम उमर में कुछ कर गुज़रने की चाहत थी. जब भी वो किसी दृष्टिहीन व्यक्ति को देखते तो उन्हें लगता की समाज के इस तपके के लिए उन्हें कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे उनका जीवन सुधरे. ये उसी सोच का नतीजा है की आज उनके इजात किए हुए चश्मे की लोग सराहना कर रहे हैं.
अगर खबरों की माने तो बड़े बड़े संस्थानों ने इस नये इनोवेशन को और अच्छे तरह से लोगों तक पहुँचाने की इच्छा ज़ाहिर की है. प्रदेश के इनोवेशन अवॉर्ड से सम्मानित दिव्यांश के इस चश्मे की कीमत सिर्फ़ Rs 700 है.
2018 के आँकड़ों की माने तो 4% के ऊपर दुनिया के दृष्टिबाधित अकेले उत्तर प्रदेश में रहते हैं. मोटे तौर पर इसका मतलब है की 1.85 मिलियन लोग. ये प्रदेश स्वास्थ विभाग के रेकॉर्ड बताते हैं. जानकारों का मानना है की इस नंबर में हर साल इज़ाफ़ा ही होता रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर देश में कुछ खबरों की माने तो 7 मिलियन दृष्टि बाधित भारत में हैं. ज़्यादातर समय में पाया गया है की दृष्टि चले जाने का मूल कारण कैटराक्त और रिफरॅक्षन में दिक्कत माना जाता है.

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