बड़ा खुलासा: हिमाचल में इस बीमारी के साथ पैदा हो रहे हैं कई बच्चे

हिमाचल प्रदेश में बहुत से बच्चे दिल की बीमारी के साथ पैदा हो रहे हैं। 30 साल से कम उम्र के 1000 बच्चों और युवाओं में से छह में जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) पाया गया है। ऊंचे क्षेत्रों में जन्म के वक्त ऑक्सीजन की कमी होना भी इसका एक कारण है। आईजीएमसी शिमला के चिकित्सकों की टीम के शोध को हाल ही में इंडियन हेल्थ जर्नल में भी छापा गया है।

पैदा हो रहे हैं कई बच्चेइस अध्ययन को हिमाचल प्रदेश के चार गांवों में किया गया। ये गांव सोलन के कुनिहार, चंबा के साहू, सिरमौर के हरिपुरधार और किन्नौर के रिब्बा क्षेत्र के हैं। इनमें कुल 1882 बच्चों और 30 साल तक के युवाओं की जांच की गई। यह जांच 909 बच्चों, बालकों एवं युवकों और 973 बच्चियों, बालिकाओं और युवतियों की हुई।

इनमें से 12 में जन्मजात हृदयरोग पाया गया। यानी 1000 की जनसंख्या पर 6.3 में जन्म से ही यह बीमारी पाई गई। इनमें चार मरीज पुरुष वर्ग और आठ मरीज महिला वर्ग से रहे। यानी 33 फीसदी पुरुष और 67 प्रतिशत महिलाएं रहीं। इनमें आरट्रियेल सेप्टल डिफेक्ट ज्यादा पाया गया। दूसरे नंबर पर वेंटरीकूलर सेप्टल डिफेक्ट पाया गया। महिलाओं में भी आरट्रियेल सेप्टल डिफेक्ट ज्यादा पाया गया।
दिल की सर्जरी को आने वालों में भी बच्चे ज्यादा

आईजीएमसी शिमला के कार्डियोलाजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजीव भारद्वाज ने इस शोध की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि जन्मजात हृदय रोग के बहुत से कारण अज्ञात रहते हैं।

गर्भवती महिलाओं की सही दिनचर्या का न होना, मां-बाप में से किसी को दिल की बीमारी का होना, ऊंचे क्षेत्रों में जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी का होना भी इसका एक कारण है।

आईजीएमसी शिमला के कार्डियोवेस्कुलर सर्जरी विभाग में दिल की सर्जरी के लिए आने वालों में भी ज्यादातर बच्चे हैं। विभाग के सूत्रों ने बताया कि एक महीने में यहां पर 25 से 30 मरीज सर्जरी के लिए आ रहे हैं।

इनमें 20 से 25 फीसदी मरीज बच्चे होते हैं। हालांकि, इनमें जन्मजात हृदयरोगियों के अलावा अन्य वजहों से दिल के रोगी बनने वाले बच्चे भी आ रहे हैं। अन्य वजहों में पैतृक कारण, कुपोषण जैसे कारण भी हो सकते हैं। बहुत से बच्चों के दिल में छेद पाए जा रहे हैं।

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