रिसर्च में खुलासा : तनाव में हैं सरिस्का के टाइगर, नहीं बढ़ा पा रहे कुनबा

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अलवर(राजस्थान). सरिस्का बाघ परियोजना में मानवीय दखल के कारण बाघ एवं बाघिनें तनाव में है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से देश के पांच टाइगर रिजर्व पन्ना, बांधवगढ, कान्हा रणथंभौर व सरिस्का में कराए गए शोध में इसकी पुष्टि हुई है। सरिस्का के बाघों में तनाव के दौरान शरीर में पैदा होने वाला हार्मोन्स ग्लूकोकाॅर्टिकाेइड्स की मात्रा अन्य अभयारण्य के बाघों से दो गुनी ज्यादा मिली है। इसका असर सरिस्का में बाघों की वंश वृद्धि पर पड़ रहा है।
सरिस्का अभयारण्य में मौजूद नौ बाघिनों में से सिर्फ तीन ने ही बच्चे दिए हैं। छह बाघिनों के शावक पैदा नहीं हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे नहीं देने के पीछे जंगल में मानवीय दखल है। मौजूदा समय में सरिस्का के कोर एरिया में 29 गांव है। इसके अलावा जंगल की सीमा व उसके आसपास करीब 400 से 500 गांव बसे हैं।ये भी पढ़े: बड़ी खबर: सेना ने मार गिराए अलकायदा के तीन आतंकी, मुठभेड़ जारी
जंगल के कोर एरिया में बने मंदिर पांडुपोल व भर्तृहरि मेले में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। जंगल व उसके आसपास इतनी बडी संख्या में लोगों की मौजूदगी का असर बाघों की जैविक गतिविधियों पर पड़ रहा है। यही कारण रहा कि मध्य प्रदेश का पन्ना टाइगर रिजर्व में सरिस्का से एक साल बाद बाघ-बाघिनों की शिफ्टिंग शुरू की गई। सरिस्का में चार साल बद पहली बार दो शावक पैदा हुए तब तक पन्ना में बाघ-बाघिनों की संख्या 18 तक पहुंच चुकी थी। मौजूदा समय में पन्ना में करीब 40 बाघ-बाघिन है जबकि सरिस्का में सिर्फ 14 बाघ-बाघिनों की संख्या में है। देश में 50 टाइगर रिजर्व में सरिस्का एक ऐसा टाइगर रिजर्व है जहां के बाघ सबसे अधिक तनाव में है। यही कारण है भारत के अन्य टाइगर रिजर्व में जहां बाघोंं की संख्या में तेजी से बढ़ रही वहीं सरिस्का पिछड़ा हुआ है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने जांच इसकी जांच की।
बाघ और बाघिनों के शरीर में मौजूद हार्मोन्स लेवल की जांच की। वैज्ञानिकों ने सरिस्का, पन्ना, बांधवगढ, कान्हा और रणथंभौर के बाघों पर शोध किया। पांचों टाइगर रिजर्व से बाघ-बाघिनों के स्कैट (मल) को हैदराबाद की प्रयोगशाला में भेजा गए। जांच रिपोर्ट आने के बाद वैज्ञानिक खुद दंग रह गए। सरिस्का के बाघ-बाघिनों के शरीर में ग्लूकोकॉर्टिकोइडस की मात्रा 80 नैनो ग्राम मिली जबकि अन्य अभयारण्य के बाघ-बाघिनों में यह मात्रा 40 से कम मिली।सरिस्का में ज्यादा शिफ्टिंग फिर भी नहीं बढ़ी बाघों की संख्या
सरिस्का में पन्ना से ज्यादा बाघिनों को शिफ्टिंग की गई लेकिन फिर भी बाघों की जनसंख्या नहीं बढ़ी। रणथंभौर से सरिस्का में पांच बाघिन व तीन बाघ शिफ्ट किए जबकि पन्ना कान्हा व बांधवगढ और पेंच से पांच बाघिन व एक बाघ को ही लाया गया था।शोध में पता लगा कि सरिस्का के बाघ -बाघिनों के शरीर में तनाव के समय रिलीज होने वाले हार्मोन्स की मात्रा अन्य अभयारण्य के बाघों की तुलना में अधिक है। कारण है कि सरिस्का में मानवीय दखल ज्यादा है। इससे उन्हें मेटिंग में परेशानी होती है। – डॉ.गोविंद सागर भारद्वाज, मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्रीय निदेशक सरिस्का





