राष्ट्रपति का पंजाब दाैरा: जालंधर ‘नो फ्लाइंग जोन’ घोषित…

राष्ट्रपति 16 जनवरी को जालंधर पहुंच रहीं हैं, जिसके मद्देनज़र सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

भारत की राष्ट्रपति द्राैपदी मुर्मू के 16 जनवरी को जालंधर आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की है।

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट-सह-अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) अमनिंदर कौर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला जालंधर को ‘नो फ्लाइंग जोन’ घोषित किया है। जारी आदेशों के अनुसार 14 जनवरी से 16 जनवरी 2026 तक जिला जालंधर की सीमाओं में किसी भी प्रकार के सिविल रिमोट/पायलट एयरक्राफ्ट सिस्टम, ड्रोन, हेलीकॉप्टर या अन्य उड़ने वाले उपकरणों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध राष्ट्रपति, भारत एवं अन्य वीवीआईपी के आधिकारिक हेलीकॉप्टरों व विमानों पर लागू नहीं होगा।

राष्ट्रपति 16 जनवरी को जालंधर पहुंच रहीं हैं, जिसके मद्देनज़र सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

15 को अमृतसर आएंगी राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्राैपदी मुर्मू 15 जनवरी को गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (डीएनडीयू) के गोल्डन जुबली दीक्षा समारोह में शिरकत करेंगी। इसके मद्देनजर जिला प्रशासन ने सुरक्षा और तैयारियों को लेकर विशेष प्रबंध किए हैं। समारोह और संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए लगभग 30 अधिकारियों की अलग-अलग ड्यूटी लगाई गई है जिनमें पीसीएस रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं।

राष्ट्रपति सुबह श्री गुरू रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, अमृतसर पहुंचेंगी, जहां उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके बाद वे सड़क मार्ग से विश्वविद्यालय पहुंचेंगी और 50वें दीक्षा समारोह में छात्रों को डिग्री प्रदान करेंगी। समारोह के बाद राष्ट्रपति ताज स्वर्णा होटल में रुकेंगी। अगले दिन सुबह वे श्री गुरु रामदास जी एयरपोर्ट से जालंधर स्थित डाॅ. बीआर आंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के 21वें दीक्षा समारोह में शामिल होने के लिए रवाना होंगी।

एसएसपी अमृतसर देहाती और पुलिस कमिश्नर सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालेंगे जबकि अन्य अधिकारी समारोह स्थल और मार्गों पर सतर्कता बनाए रखेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी राष्ट्रपति दौरे के लिए अपने स्तर पर विशेष इंतजाम किए हैं। पद्मश्री और उच्च रैंक के अधिकारियों की उपस्थिति के बीच यह कार्यक्रम राज्य में शैक्षणिक उपलब्धियों और सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।

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