राफेल डील केसः CAG रिपोर्ट से 3 पेज गायब, जानिए कहा गए..

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को राफेल लड़ाकू विमान सौदे में दाखिल हुई पुनर्विचार याचिक पर सुनवाई हुई. अटॉर्नी जनरल (सरकार के वकील) ने कोर्ट में कहा कि इस मामले में सरकार से सीएजी रिपोर्ट दाखिल करने में चूक हुई है. उन्होंने कहा कि राफ़ेल सौदे की फ़ाइल से लीक हुए कागजों में विमान की कीमत बताई गई है. राफेल विमान की कीमत बताया जाना सौदे के शर्तों का उल्लंघन है. अटार्नी ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जो काग़ज़ दिये हैं उन्हें सबूत नहीं माना जा सकता, क्योंकि वो चोरी किये गए है. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि गोपनीय दस्तावेज को साक्ष्य अधिनियम के तहत साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता और न ही ऐसे काग़ज़ों को पब्लिश ही किया जा सकता है.
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट दायर करने में सरकार से चूक हुई है, उसमे तीन पेज गायब है. वो इन पेज को भी रिकॉर्ड पर लाना चाहते है. अटारनी जनरल ने लीक हुई पेजों को रिव्यू पिटीशन से हटाने की मांग की.स रकार का दावा है कि ये प्रिविलेज्ड डॉक्यूमेंट है.

अटॉर्नी जनरल ने कहा- रक्षा मंत्रालय से लीक दस्तावेजों को पुनर्विचार याचिका से हटाया जाए, क्योंकि उन दस्तावेजों पर भारत सरकार का अधिकार है. गोपनीय दस्तावेज को साक्ष्य अधिनियम के तहत साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता. इन कागजों को जो याचिकाकर्ता ने दिये हैं उन्हें सबूत नहीं माना जा सकता क्योंकि वो चोरी किये गए है. कागजों में राफेल की कीमत बताई गयी है जो सौदे के शर्तों का उल्लंघन है
वकील एमएल शर्मा- अगर दस्तावेज गोपनीय है तो सरकार ने अभी तक उक्त मामले में ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट के तहत केस क्यों नहीं दर्ज कराया?
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मामले में अभी जांच चल रही है. 
याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि – ये दस्तावेज और काग़ज़ तो पहले से ही पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं, जिन दस्तावेजों की चोरी की बात कही जा रही है वो सभी कागजात पब्लिक में पहले से पडे है अगर एक बार डाक्यूमेंट पब्लिक में हैं तो उसे कैसे ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट में माना जाएगा.

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