रमजान 2019: रोजेदारों पर बरसेगी खुदा की रहमत

ईद का रमजान से बड़ा घनिष्ठ सम्बन्ध है। रमजान के मास में ही अल्लाह की ओर गार-ए-हिरा में हजरत मुहम्मद पर कुरान उतरा था। पैगम्बर हजरत मुहम्मद (सल़) ने फरमाया कि रमजान महीने का शुरू का हिस्सा रहमत, दूसरा हिस्सा मगफिरत और तीसरा हिस्सा जहन्नुम की आग से आजादी का सबब है। हजरत मुहम्मद के अनुसार रमजान की प्रथम रात्रि आते ही शैतानों और जिन्नातों को जकड़ दिया जाता है। दोजख के सारे द्वार बन्द कर दिये जाते हैं। जन्नत की ओर जाने वाले सभी द्वार खोल दिये जाते हैं। इस्लाम के पांच स्तम्भों में नमाज के बाद रोजे का महत्व है।.

ईद का अर्थ होता है-प्रसन्नता। हर धर्म में खुशी मनाने के कई पर्व होते हैं, उसी प्रकार के मुसलमानों के लिए ईद-उल-फित्र है। मगर यहां खुशी का अभिप्राय अपनी निजी खुशी नहीं, बल्कि इसका सैद्धांतिक अर्थ है कि हम दूसरों को कितनी खुशी दे सकते हैं। वैसे यह भी कहा जाता है कि ईद अल्लाह की ओर से उन लोगों को इनाम है, जिन्होंने रमजान के पूरे मास रोजे रखे हैं।.

आजकल गर्मी का मौसम है और रोजे में एक व्यक्ति सबेरे तीन बजे से लेकर शाम सवा सात बजे तक बिना खाए और पानी की एक बूंद पिए बिना रहता है। इसका एक भावनात्मक पहलू यह भी है कि हमें पता चल जाता है कि एक निर्धन और फकीर की क्या स्थिति रहती है। इसके अतिरिक्त तीस रोजों में हर व्यक्ति को हर प्रकार की बुराई, काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि से किनारा करना होता है। वैसे भी ईद में जो शब्द ‘फित्र’ आता है, उसका अर्थ होता है कि ईद की नमाज एवं त्योहार से पूर्व फितरा यानी दान देना, ताकि उससे निर्धन लोग भी हंसी-खुशी त्योहार मना सकें।.
ईद का एक किस्सा है- हजरत मुहम्मद (सल.) जब मक्का की किसी सड़क से गुजर रहे थे, तो उन्हें रोता हुए एक अनाथ बच्चा दिखाई दिया, जो कह रहा था कि उसका कोई नहीं है। जब आपने उसे देखा तो उसको पुचकारा और अपने साथ ले जाकर उसे कपड़े दिलवाए, भोजन और मिठाई दिलवाई। वह सब लेकर बच्चा खुशी-खुशी दौड़ता हुआ अपने ठिकाने पर गया और सबको बताया कि इस प्रकार हजरत मुहम्मद ने उसके आंसू पोछे और औरों की तरह उसे भी त्योहार की खुशियों में शामिल किया।.
इस्लाम की भी यही भावना है कि अगर आपके पड़ोसी ने खाना नहीं खाया है, तो आपका कर्तव्य बनता है कि उसके पास जाएं और जिस रूप से भी हो सके, सहायता करें। आमतौर पर ईद का त्योहार धार्मिक से अधिक सामाजिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। इसमें कोई दो राय नहीं कि जहां तक साम्प्रदायिक सद्भाव और आपसी मेल-जोल की भावना का प्रश्न है, ईद उस पर खरी उतरती है।





