जालंधर.श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षा बंधन सात अगस्त को है। खंडग्रास चंद्र ग्रहण भी इसी दिन है। इस कारण बहनों को राखी बांधने के लिए सिर्फ 2.47 घंटे का समय ही मिलेगा। लगभग तीन घंटे का यह समय भी संयोग से मिल रहा है क्योंकि चंद्रग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले लग जाता है और भद्रा का भी साया रहता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भद्रा और ग्रहण सूतक के मध्य का समय ही शुभ रहता है। राखी के दिन ही चंद्र ग्रहण आने का यह मौका 12 साल बाद आया है। 7 अगस्त को सुबह सूर्योदय से पहले ही भद्रा लग जाएगी, जो सुबह 11.05 तक रहेगी। इसके बाद रात के समय लगने वाले ग्रहण का सूतक दोपहर 1.52 बजे से शुरू होने से राखी बांधने के लिए मध्य का 2.47 घंटे तक का समय मिला है।
रक्षाबंधन को ग्रहण रात 10.52 से शुरू होकर 12.48 बजे तक रहेगा, जबकि ग्रहण का सूतक काल दोपहर 1.52 मिनट से शुरू होकर 11.29 बजे तक रहेगा। ग्रहण भारत सहित दक्षिणी और पूर्वी एशिया के अधिकतर देशों में संपूर्ण यूरोप, अफ्रीका और आॅस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा।
ग्रहण स्पर्श (प्रारंभ): रात 10 बजकर 52 मिनट 56 सेकेंड
ग्रहण मध्य : रात 11 बजकर 50 मिनट 29 सेकेंड
ग्रहण मोक्ष (समाप्त) : 12 बजकर 48 मिनट 9 सेकेंड
ग्रहण की कुल अवधि (कुल समय) : 1:55 मिनट है।