रंगों के उत्सव में न पड़ें बीमार, एक्सपर्ट ने बताए सुरक्षित होली खेलने के ‘सीक्रेट’ टिप्स

होली यानी रंगों की बौछार, पसंदीदा पकवान और मस्ती अपार, पर ध्यान रहे कि संक्रमित पानी और असुरक्षित रंगों के साथ-साथ खानपान में लापरवाही से होली का रंग न हो जाए बदरंग। कैसी हो सुरक्षित व आनदंदायक होली? क्या बरतनी चाहिए सावधानी, किन बातों का रखना है विशेष ध्यान, बता रही हैं सीमा झा…

आज खूब खेलें रंग, जमकर करें मस्ती। चाहे गुझिया हो या मालपुआ, दहीबड़े हों या आपका कोई अन्य मनपसंद व्यंजन, इनके प्रयोग से होली को और बनाएं खास। लेकिन त्योहार का रंग और गाढ़ा करने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान भी रखना होगा, साथ ही बरतनी होगी छोटी-छोटी सावधानियां। कहीं ऐसा न हो कि त्योहार का अति-उत्साह आपको कर बीमार बना दे और आपके दैनिक कामकाज व दिनचर्या खराब होने लगे।

स्वाद नहीं देखें रंग भी
बिस्किट, कुकीज, कोल्ड ड्रिंक्स, बच्चों की गोलियां, चाकलेट जैसे तमाम खाने-पीने की चीजों में कृत्रिम रंगों का खूब प्रयोग होता है। इन्हें सिंथेटिक फूड डाइ भी कहा जाता है। इनके प्रयोग से बचना जरूरी है, अन्यथा पाचन या एलर्जी की समस्या हो सकती है। कब्ज, गैस या पेट दर्द भी हो सकता है, खासकर जिन्हें कृत्रिम रंगों के प्रति संवेदनशीलता अधिक होती है। दरअसल, कृत्रिम रंगों के अधिक प्रयोग से आंतों के बैक्टीरिया (जो पाचन में सहायक होता है) पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। यह पेट में सूजन का कारण भी बन सकता है।

हानिकारक कृत्रिम रसायनों से बने रंगों से सांस या फेफड़े के संक्रमण जैसी परेशानी हो सकती है। जो लोग पहले से ही अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या एलर्जी से पीड़ित हैं, उन्हें होली खेलते हुए विशेष रूप से सतर्क होने की आवश्यकता है। इन रंगों में लेड, कापर सल्फेट और अन्य जहरीले रसायान हो सकते हैं। साथ ही, सब्जी व फलों के रंगों को गाढ़ा बनाने के लिए भी कृत्रिम रंगों का प्रयोग किया जाता है। ये सेहत के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर सकते हैं।

पानी न बने मुसीबत
पानी के बिना कैसी होली? यदि आप यही सोच रहे हैं तो यहां बात संक्रमित या अस्वच्छ पानी की हो रही है। सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. जुगल किशोर के अनुसार, हमेशा साफ पानी से होली खेलनी चाहिए। गंदा या दूषित पानी कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है। खासकर डायरिया, स्किन इन्फेक्शन और आंखों की परेशानी आपके लिए अनचाही मुसीबत पैदा कर सकती है। दरअसल, होली के दौरान टंकी, पाइप या खुले स्रोत का पानी कई बार साफ नहीं होता। अगर यह पानी मुंह में चला जाए तो बैक्टीरिया और वायरस शरीर में पहुंच सकते हैं। इससे डायरिया, उल्टी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में यह खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

स्किन एलर्जी का खतरा
प्रयास करें कि लंबे समय तक गीले कपड़ों में न रहें। गंदे पानी के संपर्क में आना त्वचा के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। खुजली, लाल चकत्ते या रैशेज हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से स्किन एलर्जी है, उन्हें और भी अधिक सावधानी रखनी चाहिए।

कृत्रिम रंगों के प्रयोग से पूर्व
कृत्रिम रंगों का प्रयोग बहुत आवश्यक होने पर एफएसएसएआइ प्रमाणित रंगों का प्रयोग कर सकते हैं।
बाजार में मिलने वाले रंगों के पैकेट के ऊपर लेबल देखकर ही खरीदारी करें।
पैकेज्ड फूड ले रहे हैं तो उस पर लगे लेबल को देखें। इससे पता चलेगा कि उसमें कौन से कलर का प्रयोग है। यदि इसका पता नहीं चले तो उन्हें नहीं खरीदना चाहिए।

कृत्रिम रंगों के प्राकृतिक विकल्प
यदि आप खाने में लाल रंग चाहते हैं तो बीट रूट यानी चुकंदर का प्रयोग करें।
हल्के गुलाबी रंग के लिए आप गुलाबी गाजर का प्रयोग कर सकते हैं।
बैंगनी रंग चाहते हैं तो गहरे रंग के गाजर का प्रयोग सही है।
पीले रंग के लिए हल्दी का प्रयोग श्रेयस्कर है।
पालक का प्रयोग खाने को हरा करने के लिए कर सकते हैं।

रंग खेलने से पूर्व क्या करें?
त्वचा पर अच्छी मात्रा में नारियल तेल, बादाम तेल या एलोवेरा जेल लगाएं। इनसे त्वचा पर एक नेचुरल लेयर बन जाएगा।
सनस्कीन लगाएं क्योंकि धूप व रंग मिलकर त्वचा का अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
रंग खेलने के दौरान बार-बार चेहरा पानी से धोना या रगड़ना सही नहीं। इससे रंग और गहराई से भीतर जा सकता है।
त्वचा संवदेनशील है या एलर्जी, एक्ने आदि है तो हर्बल रंग या गुलाल का प्रयोग अच्छा होता है।

ये सावधानियां रहें याद
रंग छुड़ाने के लिए त्चचा को रगड़ने से जलन, रैशेज हो सकता है। इससे त्चचा का रूखापन भी बढ़ सकता है।
बालों पर रंगों के साइड इफेक्ट न हो इसलिए तेल जरूर लगाएं या उन्हें ढंक लें।
बालों से रंग निकालने के लिए उन्हें हल्के शैंपू से धोएं। अधिक शैंपू के प्रयोग से भी बाल रुखे हो सकते हैं। आप अगले दिन दोबारा शैंपू कर सकते हैं।
आंखों में रंग चला गया है तो मसलें नहीं। उसे ठंडे पानी से धोएं। अधिक जलन हो तो गुलाब जल की कुछ बूंदें डालें या चिकित्सक से सलाह लें।

तरीका हो अच्छा तो आनंद होगा दोगुणा
कोई रंगों से होली खेलता है तो किसी को पेंट या अन्य नुकसानदेह पदार्थों से खेलने में मजा आता है। गांवों में तो होली का स्वरूप एकदम अलग हो जाता है। लोग गंदे पानी से भी परहेज नहीं करते। कीचड़ से भी होली खेलते हैं। शहरी इलाकों में यदि टंकी का जमा हुआ पानी हो या ठंडा पानी, होली में इसका प्रयोग धड़ल्ले से होता है जो आपको बीमार बना सकता है। अगर आपकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है तो यह चुनौती और अधिक है।

इसी तरह, खानपान में भी देखें तो लोग इन दिनों खाने में कुछ छूट पाना चाहते हैं ताकि होली ही नहीं, होली से कुछ दिन पूर्व या बाद में भी गुझिया, मिठाई हो या बाहर का खाना खा सकें। यह कुछ दिनों की छूट आपके कोलेस्ट्रोल स्तर को बढ़ा सकता है। यदि मधुमेह है तो आप ऐसी छूट नहीं ले सकते।

होली पर नशा करने का चलन भी आम है। अल्कोहल के साथ भांग का प्रयोग भी खूब होता है। यह आपके दिमाग पर भी असर डाल सकता है। भांग से शार्ट टर्म मेमोरी लास का खतरा रहता है, इसलिए होली खेलें, पर यह नियंत्रित तरीके से हो ताकि सेहत पर बुरा असर न हो।

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