योग्‍य डॉक्‍टरों को इलाज की छूट मिले, झोलाछापों की दुकान हो बंद, कोविड संक्रमण रुक जायेगा

-आईएमए मेरठ शाखा के सचिव डॉ अनिल नौसरान ने मुख्‍यमंत्री को पत्र भेजकर दिया सुझाव

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डॉ अनिल नौसरान

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन की मेरठ शाखा के सचिव डॉ अनिल नौसरान ने इस समय फैली वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण पर काबू पाने के लिए उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को पत्र भेजकर सभी क्‍वालीफाइड चिकित्‍सकों को कोविड का इलाज करने की छूट देने और अयोग्‍य कथित चिकित्‍सकों (झोलाछाप डॉक्‍टर) की क्‍लीनिक बंद करने का सुझाव दिया है, उनका कहना है कि मुझे पूर्ण विश्‍वास है कि इस कदम के शीघ्र परिणाम सामने आयेंगे और संक्रमण पर लगाम लग सकेगी।

डॉक्टर नौसरान ने मुख्यमंत्री को ई मेल से भेजे गए पत्र में कहा है कि पूरे उत्तर प्रदेश में दिन-प्रतिदिन कोरोना के मरीज बढ़ते जा रहे हैं, यही नहीं चिकित्सक भी इस बीमारी के कारण दिन-प्रतिदिन काल के गाल में समा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि जैसा मैं पहले भी कह चुका हूं, इस सुझाव पर विचार किया जाना चाहिये। उन्‍होंने कहा कि मेरा सुझाव है कि जितने भी योग्य चिकित्सक अपने क्लीनिक और अस्पताल चला रहे हैं उन सभी को निर्देशित किया जाए और उनको छूट दी जाए कि सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए वह किसी भी कोविड मरीज का इलाज करने के लिए स्वतंत्र हैं, इसके साथ ही साथ जितने भी अस्पताल, छोटे क्लीनिक, झोलाछापों और गैर चिकित्सकों द्वारा चलाए जा रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से सील लगाकर बंद कराया जाए।

डॉक्टर नौसरान का यह भी कहना है कि आज संक्रमण के शिकार बड़ी संख्‍या में लोग हो रहे हैं, इस कारण अस्‍पतालों में बेड नहीं हैं, लोगों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में सभी चिकित्‍सकों से इलाज मिलने की स्थिति में जरूरतमंद को समय पर और अपने नजदीक इलाज मिल सकेगा। इस कदम से जहां संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी वहीं कोविड बीमारी के क्षेत्र में स्टडी करने का भी मौका मिलेगा, क्योंकि मरीजों को देखने के अनुभव से ही नए रास्ते निकलते हैं। इस पत्र को उन्‍होंने जिलाधिकारी के माध्‍यम से भी मुख्‍यमंत्री को भेजा है।

उनका कहना है कि मेरा मानना है कि कोई भी चिकित्‍सक जो डॉक्‍टरी की पढ़ाई में लम्‍बा समय बिताता है, वह पूरी जिम्‍मेदारी से मरीज का इलाज करेगा, ऐसे में उन्‍हें कोविड के इलाज की छूट दी जा सकती है। इसके परिणाम बेहतर ही मिलेंगे, क्‍योंकि लोगों के झोलाछाप चिकित्‍सकों के चक्‍कर में पड़ने से नुकसान होता है, और उसे उचित इलाज में देरी होती है, साथ ही जान जाने का खतरा भी बना रहता है।

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