यूरिया की एक-एक बोरी के लिए मारामारी, 267 रुपए की बोरी बिक रही 1000 में

अजय कश्‍यप
लखनऊ। किसान परेशान हैं। फसली सीजन सर पर है। खेती करनी है। फसलों की अच्छी उपज चाहिए। उसे कीटों से बचाना है। मगर इसके लिए उन्हें यूरिया नहीं मिल पा रही है। दुकानों पर किसानों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। घंटों लाइन में लगने के बाद भी यूरिया नहीं मिल पा रही है। कहीं दुकानदारों को यूरिया कम मात्रा में मिली है। कहीं कालाबाजारी हो रही है। नतीजा यह है कि प्रदेश में लाखों किसान परिवार यूरिया की किल्लत से बुरी तरह त्रस्त हैं। यूरिया संकट का मुद्दा इतना गहराता जा रहा है कि अब यह राजनीतिक रूप भी लेता जा रहा है।
यूरिया संकट पर विपक्ष हमलावर
बसपा, सपा और कांग्रेस ने इस मामले पर योगी सरकार पर निशाना साधा है। उधर, प्रदेश सरकार ने यूरिया संकट से निपटने के लिए जगह-जगह छापेमारी की है। कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की हैं। मगर यूरिया संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इतना ही नहीं, अगर कहीं सरकारी केंद्रों या बाजार में यूरिया मिलती भी है तो वहां इस कोरोना की गंभीरता को दरकिनार रख किसानों की भीड़ लग जाती  है। सोशल डिस्टेंसिंग के नियम तार-तार हो रहे हैं।

किसानों का #Urea के लिए परेशान होना इस समय स्वाभाविक है। खरीफ फसलों का सीजन है। आलू और गेहूं की पैदावार को भी यूरिया का छिड़काव चाहिए। मगर यूरिया न मिल पाने के कारण किसानों को फसल चौपट होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि मानसून के चलते धान की रोपाई तो बढ़िया हुइ है, लेकिन यूरिया न मिल पाने से हम अब डरे हुए हैं। सरकारी केंद्रों पर पर यूरिया की जबरदस्त कमी है। बाजार की दुकानों में इसकी कालाबाजारी हो रही है।
बताते हैं कि सरकारी बिक्री केंद्रों पर सब्सिडी वाली #Urea की 45 किलो की बोरी 267 रुपये में दी जाती है, जबकि खुले बाजार में इसकी कीमत 951 रुपये है। भारी अंतर होने के चलते सरकारी बिक्री केंद्रों पर दबाव ज्यादा है। कई जिलों में खाद की कालाबाजारी की सूचना मिलने पर छापे मारे गए हैं और अब तक बाराबंकी, गोरखपुर, अयोध्या जैसे जिलों में दो दर्जन से ज्यादा खाद दुकानदारों के लाइसेंस भी रद्द किए गए हैं।
यह भी गौर करने वाली बात है कि उत्तर प्रदेश में इस बार बेहतर मॉनसून के चलते करीब 60 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई है। यह बीते सालों से दो लाख हेक्टेयर ज्यादा है। धान का रकबा बढ़ने के चलते और लगातार बारिश से अब किसानों को यूरिया ज्यादा जरूरत है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रकबा बढ़ने और तय समय से रोपाई पूरी हो जाने के कारण इस बार बीते सालों के मुकाबले दोगुना यूरिया की मांग बढ़ी है। इसी महीने 22.89 लाख टन के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 27.31 लाख टन यूरिया की खपत हो चुकी है। बीते साल इस समय तक केवल 20 लाख टन यूरिया की खपत हुयी थी।
नेपाल में हो रही तस्करी
भारत और नेपाल के बीच हाल में संबंध भले ही तनावपूर्ण हों लेकिन बहराइच से यूरिया की कालाबाजारी नेपाल में की जा रही है। जिले के मुर्तिहा, रूपईडिहा, सुजौली औऱ नवाबगंज सीमा क्षेत्र से यूरिया क़ी नेपाल को तस्करी की जा रही है। जबकि जिले के पयागपुर, बहराइच सदर, नवाबगंज, रुपईडीहा बाबागंज, चितौरा, मैं पुरवा और मासी में यूरिया खाद की किल्लत है। इससे धान की उत्पादकता पर असर पड़ सकता है।
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यूरिया संकट पर विपक्ष हमलावर
उत्तर प्रदेश में लाखों किसान परिवार #Urea खाद की किल्‍लत से बहुत परेशान हैं। सरकार, कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई करे ताकि दोहरी मार झेल रहे किसानों को इस वर्ष फिर बर्बाद होने से बचाया जा सके।
मायावती, पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो
यूपी में #Urea के लिए किसानों की परेशानी समझी जा सकती है। फसलों का सीजन है और किसान यूरिया के लिए बुरी तरह संकट झेल रहे हैं। सोनभद्र का मेरा पोस्ट किया वीडियो जिसमें किसानों की लंबी कतार लगी है। इस बात का प्रमाण है कि किसान परेशान हैं।
प्रियंक गांधी वाड्रा, कांग्रेस महासचिव
खाद की कालाबाजारी करने वालों पर एनएसए लगे
प्रदेश में खाद की कालाबाजारी जल्द से जल्द रोकी जाए। किसान हितों के साथ खिलवाड़ करने वालों पर एनएसए की कार्रवाई की जाए। प्रदेश में खाद एवं अन्य फसल संबंधी चीजों की कालाबाजारी तत्काल रोक जरूरी है।
योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री
कमी नहीं होने देंगे

अब तक प्रदेश में सरकारी व निजी दुकानों को 25.67 लाख टन यूरिया पहुंचाई जा चुकी है जबकि कुछ स्टॉक पहले का भी मौजूद था। किसानों के बीच बढ़ी मांग को देखते हुए प्रादेशिक कोआपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) को 40000 टन और भी रिलीज करने को कहा गया है। यूरिया की कमी नहीं होने दी जाएगी। कालाबाजारी करने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जा रही है।
सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री, उत्तर प्रदेश
#Urea संकट से निपटने के लिए की जा रही छापेमारी में अब तक 623 विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। 35 से ज्यादा विक्रेताओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई गई है। प्रदेश में खाद की कमी नहीं है। पिछले वर्ष से 20 प्रतिशत अधिक खाद उपलब्ध है और 30 फीसद से अधिक वितरण भी हो चुका है। अब तक कुल 9,747 छापे डाले जा चुके हैं। 3,287 नमूने लिए गए। वितरण में अनियमितता मिलने पर 517 उर्वरक विक्रेताओं को नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा 17 दुकानों को सील किया गया, जबकि 666 को चेतावनी दी गई है।
देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव कृषि
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