यूपी में कर्मचारी आंदोलन की तैयारियों की वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग से समीक्षा

-19 मई को काला फीता बांधकर भत्‍तों को काटने के खिलाफ जताया जायेगा विरोध

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने केंद्र सरकार द्वारा महंगाई भत्ता फ़्रीज किये जाने और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारियों को मिल रहे 6 भत्तों को पूरी तरह समाप्त करने पर 19 मई को काला फीता बांधकर कार्य करने और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री कार्यालय को ईमेल और ट्वीट करने के प्रस्तावित कार्यक्रम के तैयारियों की क्षेत्रीय समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की।

आगरा, कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, बस्ती, फैज़ाबाद, देवीपाटन, मिर्जापुर, इलाहाबाद मंडल की समीक्षा की अध्यक्षता सुरेश रावत ने की। कल दिन में लगातार बचे हुए मंडलों व जनपदों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होगी। परिषद ने कहा सरकार के ऐसे निर्णय कर्मचारियों के साथ सौतेलेपन का प्रतीक है।

परिषद के महामंत्री अतुल मिश्र ने कहा कि प्रदेश के सभी जनपदों से कर्मचारियों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, सभी जनपदों के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के लाखों कर्मचारी राज्य सरकार के फैसले से निराश हो गए हैं उक्त सभी भत्ते विगत कई वर्षों से कर्मचारियों को प्राप्त हो रहे थे। परिषद ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों को दोयम दर्जे का नागरिक मानते हुए पहले इन्हीं 6 भत्तों को स्थगित किया, इस माह के वेतन में कटौती भी हो गयी। ऐसे में सरकार का व्यय भार तो अपने आप कम हो गया, कर्मचारियों को आशा थी कि इस महामारी से निपटने वाले कर्मचारियों को संक्रमण काल के बाद स्थगित भत्ते पुनः प्रदान कर दिए जाएंगे जिसे सरकार ने आज जड़ से समाप्त कर दिया।

उन्‍होंने कहा कि आज जब कर्मचारी अपनी जान पर खेलकर संक्रमण काल में लगातार जन सेवा में लगा हुआ है, जनता प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की तारीफ कर रही है, सरकारी कर्मचारियों के प्रति जनता के दिलों में विश्वास कायम हुआ है, लेकिन ऐसे समय कर्मचारियों को पुरस्कृत करने के स्थान पर उन्हें दंडित करने जैसा कार्य समझ से परे है। कर्मचारी खुद ही इस मामले में आगे आकर प्रधानमंत्री केयर और मुख्यमंत्री आपदा कोष में लगातार सहयोग कर रहा है बहुत से सरकारी कर्मचारी अपने वेतन से अंशदान निकालकर गरीबों-मजदूरों और जिन लोगों को खाना नहीं मिल पा रहा है उनके लिए खाने का प्रबंध कर रहे हैं अनेक सरकारी कर्मचारी गरीबों के घर-घर जाकर हर तरह से मदद कर रहे हैं। जनता आज देश के सरकारी कर्मचारियों को अपना मसीहा मान रही है चाहे वह चिकित्सक हो फार्मेसिस्ट लैब टेक्नीशियन नर्सेज सहित सभी चिकित्सा कर्मियों को जनता दूसरे भगवान का दर्जा दे रही है और वास्तव में  सभी सरकारी कर्मचारी  देवदूत के रूप में  जनता की इस दुख की घड़ी में अपने परिवार  और अपनी जान की परवाह किए बगैर पूरे मनोयोग से लगे हुए हैं प्रदेश की पुलिस दिन-रात जनता की सेवा में है ऐसे समय में इन कर्मचारियों को कुछ न कुछ पुरस्कार दिया जाना चाहिए था लेकिन सरकार द्वारा पुरस्कार तो छोड़िए उनको पूर्व से मिल रहे भत्ते समाप्त कर दिया जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि कर्मचारियों के लिए सरकार के पास कोई कल्याणकारी नीति नहीं है, और न ही कर्मचारियों को सरकार अपना अंग मानती है।  

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