यूपी की सियासत में घरेलू महिला की धमाकेदार एंट्री, ऐसे अचानक बन गईं मंत्री


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साल भर पहले एक हाउसवाइफ से अब यूपी सरकार में मंत्री बन गईं स्वाति सिंह की राजनीति में इंट्री बेहद नाटकीय रही। पति दयाशंकर सिंह बीजेपी के नेता थे। काफी कोशिश के बाद भी वह विधान परिषद का चुनाव नहीं जीत पा रहे थे। दूसरी बार चुनाव हारने के बाद बीजेपी उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ एक विवादित बयान दे दिया।
इसके बाद स्वाति को विधानसभा में टिकट मिलना भी तय हो गया था। हुआ भी वही। उन्हें लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से उम्मीदवार बनाया गया। जहां से बीजेपी तीन दशकों से जीत को तरस रही थी। स्वाति सिंह ने यह सीट बीजेपी की झोली में डाली और इसके बाद उन्हें योगी सरकार में मंत्री पद मिला। यही नहीं उनके पति दयाशंकर सिंह का निलंबन भी वापस ले लिया गया।
लेकिन मंत्री बनने के दो महीने के अंदर ही स्वाति सिंह विवादों में घिर गईं। पहले बियर बार की लांचिंग को लेकर और फिर बड़े मंगल के अवसर पर भंडारे के दौरान प्रसाद में 100-100 रुपए बांटने को लेकर स्वाति सिंह विवादों में घिरी हैं।
स्वाति सिंह ने 2001 में इलाहाबाद के मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी से एमएमएस की डिग्री ली है। 2007 में उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से एलएलएम की डिग्री हासिल की। पति राजनीति में थे लेकिन स्वाति को इससे कोई लगाव नहीं था। वह अपने दो बच्चों के पालन पोषण में ही व्यस्त रहती थीं।
स्वाती सिंह को दयाशंकर सिंह प्रकरण के बाद बीजेपी ने अपने परिवर्तन सभाओं में मंच का हिस्सा बनाया था। उन्हें बोलने का भरपूर मौका दिया गया। इसके पीछे बीजेपी की रणनीति थी कि उन्हें एक बड़ी महिला नेता के रूप में प्रस्तुत कर यूपी चुनाव में फायदा लिया जाय और ऐसा हुआ भी। इससे ज्यादा बीजेपी को मायावती के जवाब में एक चेहरा मिल गया था। स्वाती सिंह मंच से मायावती पर सीधा निशाना भी साधती थीं। न सिर्फ राजनीतिक हलकों में बल्कि बीजेपी में भी यूपी चुनाव में स्वाती सिंह का नाम स्टार कैंपेनर के बतौर गूंजने लगा। हालांकि जब स्टार प्रचारकों की लिस्ट आई तो उनका नाम गायब मिला। इसके बाद स्वाति ने अपनी सीट पर जीत हासिल की। लेकिन अब स्वाति का नाम बार-बार विवादों से जुड़ने लगा है जो इस उभरती नेता के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।





