युवा भी तेजी से हो रहे हैं हार्ट अटैक का शिकार; कामकाजी लोगों में बढ़ा सबसे ज्यादा खतरा

राष्ट्रीय राजधानी में हार्ट अटैक और हार्ट से जुड़ी बीमारियों से 20 वर्षों में तीन लाख से अधिक मौत के मामले सामने आए हैं। दिल्ली सरकार के आधिकारिक आंकड़े चेतावनी दे रहे हैं कि हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कामकाजी उम्र और अपेक्षाकृत युवा आबादी भी इसकी चपेट में तेजी से आ रही है।
वर्ष 2024 में दिल्ली में 34,539 लोगों की मौत हार्ट अटैक और हार्ट से जुड़े रोगों के कारण हुई, जो वर्ष 2023 में दर्ज 22,385 मौतों की की तुलना में 12,000 से अधिक है जो एक वर्ष में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी है।
दिल्ली सरकार के डायरेक्टोरेट आफ इकोनामिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स स्वास्थ्य- मृत्यु संबंधी सांख्यिकीय डाटा अनुसार वर्ष 2005 से 2024 के बीच दिल्ली में हार्ट अटैक और हार्ट से संबंधी बीमारियों से कुल 3,29,857 लोगों की मौत दर्ज की गई। इनमें 2,10,206 पुरुष, 1,19,626 महिलाएं और 25 अन्य श्रेणी के व्यक्ति शामिल हैं।
इन आंकड़ों को आयु वर्ग के लिहाज से देखें तो सबसे अधिक 1,03,972 मौतें 45 से 64 वर्ष के लोगों की हुई । 65 वर्ष और उससे अधिक के लोगों की 92,048 और सबसे कम 46,129 25 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की हुई । चिंता की बात यह है कि कुल मौतों में 14 वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों की संख्या भी 14,321 रही, जो कुल आंकड़े का पांच प्रतिशत से अधिक है।
आंकड़े बताते हैं कि 45 से 64 वर्ष आयु वर्ग में पुरुषों में हार्ट से जुड़े रोग से मौतों की संख्या महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुनी रही । इस वर्ग में 68,177 पुरुषों और 35,795 महिलाओं की मौत दर्ज की गई। इसी तरह दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में दर्ज मौतों में भी 45 से 64 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 38.55 प्रतिशत रही, जो सवार्धिक है। 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की 34.13 प्रतिशत और 25 से 44 वर्ष आयु वर्ग की 17.11 प्रतिशत रही।
विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट से जुड़े रोग के बढ़ते मामलों के पीछे जीवनशैली एक बड़ा कारण बनकर उभर रही है। आनुवांशिक कारणों के बावजूद कम उम्र में दिल के दौरे के लिए जीवनशैली अधिक भूमिका निभा रही है | बैठी रहने वाली दिनचर्या, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, अस्वस्थ खानपान, धूम्रपान, वेपिंग, नींद की कमी और अत्यधिक तनाव हृदय स्वास्थ्य को समय से पहले नुकसान पहुंचा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते जीवनशैली में सुधार ही इस बढ़ते संकट से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है।





