मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय जहाज की सुरक्षित वापसी

27 फरवरी तक सबकुछ सामान्य था। होमुर्ज स्ट्रेट से भारतीय मालवाहक जहाज सुरक्षित आवागमन कर रहे थे। तभी 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए गए। जिसके कारण भारत समेत कई देशों के जहाज बीचों-बीच में फंस गया।
इसी दौरान कतर से भारत के लिए रवाना हुए एक भारतीय मालवाहक जहाज भी फंस गया। इस जहाज में मौजूद भारतीय चालक दल ने न केवल युद्ध के खतरों का सामना किया, बल्कि जीपीएस उपकरणों के खराब होने और पीने के पानी की भारी कमी जैसी चुनौतियों से भी जूझते रहे।
हालांकि, अब भारतीय नौसेना की सुरक्षा और भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के बाद, यह जहाज आखिरकार सुरक्षित रूप से भारत वापस लौट आया है।
भारत आने के लिए पूरी तरह तैयार थे चालक दल
दरअसल, कतर के रास लाफान में 27 फरवरी को भारतीय मालवाह जहाज पर माल लोड हो चुका है। कप्तान और चालक दल भारत की यात्रा शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। लेकिन अचानक मिडिल ईस्ट में शुरू हुए तनाव के कारण सबकुछ रूक गया।
अधिकारी ने बताई आपबीती
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एक भारतीय जहाज के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमने संयुक्त अरब अमीरात के एक बंदरगाह पर सुरक्षित लंगर डाला। हमें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा क्योंकि जीपीएस में खराबी आने लगी और जहाज पर लगे उपकरण ठीक से काम नहीं कर रहे थे।
इससे हमारी चिंता और बढ़ गई। हम समाचार देख रहे थे और क्षेत्र में हो रहे युद्ध और हमलों के बारे में अपडेट प्राप्त कर रहे थे। हमने केवल डीजी शिपिंग, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और भारतीय नौसेना के निर्देशों और सलाहों का पालन किया।”
सिर्फ एक महीने के लिए बचा था खाना
जहाज के अधिकारी ने बताया “हमारे पास एक महीने से ज्यादा समय तक चलने लायक खाना था। लेकिन पीने की पानी समस्या बनती जा रहा था। क्योंकि, मालवाहक जहाज रुकने पर बहुत कम मात्रा में पीने का पानी पैदा कर पाते हैं, और वह चालक दल के सदस्यों के लिए पर्याप्त नहीं होता, हमारे पास जो पानी था, उससे हम 7-10 दिन और गुजार सकते थे।”
10 दिनों बाद मिली खुशखबरी
बंदरगाह पर लगभग 10 दिनों के इंतजार के बाद, चालक दल को 13 मार्च को खुशखबरी मिली कि वे उसी रात अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं। इसके बाद जहाज को होमु्र्ज स्ट्रेट से निकलने के लिए ईरानी नौसेना की मदद मिली और जहाज सुरक्षित भारत लौटा।
अधिकारी ने कहा, “हमें पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी, हालांकि हम जानते थे कि भारतीय सरकार भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। हम भारतीय नौसेना के संपर्क में थे, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने के बाद हमारी सुरक्षा की। हम ईरानी नौसेना के संपर्क में नहीं थे।”





