मायावती का हमला, कहा ब्राह्मणों के मान-सम्मान व सुरक्षा पर ध्यान दे सरकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को लेकर सियासत तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी द्वारा बीते दिनों भगवान परशुराम की प्रतिमा के बहाने ब्राह्मण कार्ड खेलने के बाद अब अन्य दल भी इसमें कूद गए हैं। ताजा हलचल भाजपा एमएलसी उमेश द्विवेदी के बयान को लेकर है, जिसमें उन्होंने गरीब ‘ब्राह्मणों’ का बीमा कराये जाने की बात कही है। इसको लेकर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मायावती ने सोमवार को ट्वीट किया कि यूपी भाजपा सरकार द्वारा गरीब ब्राह्मणों का बीमा कराने की बात इस वर्ग के प्रति केवल अपनी कमियों पर पर्दा डालने के लिए ही लगता है, जबकि ब्राह्मण समाज को वास्तव में बीमा से पहले उन्हें सरकार से अपने मान-सम्मान व पूरी सुरक्षा की गारण्टी चाहिए। सरकार इस ओर ध्यान दे तो बेहतर है। मायावती इससे पहले समाजवादी पार्टी द्वारा लखनऊ में भगवान श्री परशुराम की 108 फीट मूर्ति लगवाने की बात पर भी पार्टी पर हमला बोल चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि यदि सपा सरकार को परशुराम की प्रतिमा लगानी ही थी तो अपने शासन काल के दौरान ही लगा देते। चुनाव के नजदीक आने पर मूर्ति लगाने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि बसपा किसी भी मामले में सपा की तरह कहती नहीं है, कर के भी दिखाती है। बसपा की सरकार बनने पर सपा की तुलना में परशुराम जी की भव्य मूर्ति लगाई जाएगी।
दरअसल प्रदेश में पिछले कुछ समय से ब्राह्मण कार्ड को लेकर जमकर सियासत हो रही है। अब भाजपा एमएलसी उमेश द्विवेदी ने प्रदेश के गरीब ‘ब्राह्मणों’ का बीमा कराये जाने की बात कही है। उनके इस बयान के बाद विपक्ष का भाजपा सरकार पर हमला तेज हो गया है। हालांकि उमेश द्विवेदी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उनकी इस सम्बन्ध में पार्टी नेताओं से कोई बात नहीं हुई है। इस​का पार्टी से कोई मतलब नहीं है। यह उनकी व्यक्तिगत राय है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संगठन अपनी-अपनी जाति के हितों को लेकर काम करते हैं। इसी तरह ब्राह्मणों के संगठनों से उनकी बात हुई। इस समाज की भी जरूरतें हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक भाजपा सरकार की बात है तो वह पहले से ही सबका साथ सबका विकास को लेकर काम कर रही है। ब्राह्मण बुद्धिजीवी हैं, वह जानते हैं कि भाजपा सभी वर्गों के हितों को लेकर सजग है। इसलिए विपक्ष के आरोपों का मतलब नहीं है।
वहीं समाजवादी पार्टी के नेता व प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा के मुताबिक भाजपा, बसपा और कांग्रेस हमारा कितना भी विरोध कर ले, हम अपना काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमने भगवान परशुराम की प्रतिमा सरकार में आने के बाद लगवाने की बात नहीं की है। हम तो ये काम अभी करने की बात कह रहे हैं। अगर भाजपा वास्तव में इस तरह का काम करने जा रही है, तो इसका मतलब ये है कि उसका अपनी सरकार की योजनाओं पर विश्वास नहीं है। और अगर वास्तव में वह ब्राह्मणों के लिए बीमा जैसा कुछ करना चाहती है तो खुलकर कहे। कहीं उसकी ये बात भी जुमला बनकर न रह जाए। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत कहते हैं कि बीमा पूरा समूह का कराया जाता है। जब कहीं दिक्कत आती है, तब इस तरह का काम किया जाता है। भाजपा नेता के इस बयान का मतलब है कि पार्टी ने मान लिया है कि वह ब्राह्मणों की हत्या रोकने में नाकाम है। इसलिए बीमा कराने की अलग से बात कही जा रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।

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