मातृ-दिवस : माँ हमारी पहली टीचर होती है और दोस्त भी

मातृ-दिवस हर साल माँ और उसके मातृत्व को सम्मान तथा आदर देने के लिये मनाया जाता है। इसे हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार के दिन मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के लिये माँ को खासतौर पर उनके बच्चों के स्कूलों में आमंत्रित किया जाता है। कई सारे कार्यक्रमों के साथ मातृ-दिवस के लिये शिक्षक ढ़ेर सारी तैयारियाँ करते हैं। कुछ विद्यार्थी हिन्दी और इंग्लिश में कविता तैयार करते है, निबंध लेखन, हिन्दी और इंग्लिश में बातचीत की कुछ पंक्तियाँ, भाषण, इत्यादि तैयार करते हैं। इस दिन माँ अपने बच्चों के स्कूल जाती है और इस उत्सव में शामिल होती है।

                              जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
                            माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है…

 

                                      मत कहिये की मेरे साथ रहती हैं माँ
                                   कहिए की माँ के साथ हम रहते हैं…!!!

माताओं के स्वागत के लिये शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर क्लासरुम को सजाते है। ये विभिन्न देशों में अलग-अलग तरीकों और दिनों पर मनाया जाता है हालाँकि भारत में इसे मई महीने के दूसरे रविवार के दिन मनाया जाता है। बच्चे अपनी माँ को एक खास कार्ड देकर (खुद बच्चों के द्वारा बनाया गया) उनके स्कूल में सही समय पर आने के लिये आमंत्रित करते हैं साथ ही बच्चे अनपेक्षित उपहार देकर अपनी माँ को आश्चर्यचकित कर देते है।

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