मनु भाकर ने अपने गुरु को दी अंतिम विदाई: बोलीं- मेरे पिता समान थे जसपाल राणा

अपने गुरु के पैतृक गांव उत्तराखंड के मझोन में अंतिम विदाई देने पहुंचीं मनु भाकर ने जैसे ही पार्थिव शरीर के दर्शन किए, उनकी आंखें भर आईं, वह फफक-फफक कर रो पड़ीं। पार्थिव शरीर के सामने खड़ी मनु करीब पांच मिनट तक मौन रहीं, जैसे शब्दों ने उनका साथ छोड़ दिया हो, उनकी निगाहों में अनगिनत यादें थीं, चेहरे पर संबल की छाया के बिछड़ने का दर्द और आंखों में खालीपन दिखाई दे रहा था।

अनगिनत निशानों को सटीकता की पहचान देने वाले सपनों के शिल्पकार समय के निशाने पर ठहर चुके थे। गुरु को निस्तब्ध देख मनु का धैर्य टूट गया और कांपते शब्दों में बोलीं मेरे पिता समान गुरु चले गए। उस क्षण वहां मौजूद हर व्यक्ति ने एक चैंपियन खिलाड़ी नहीं, बल्कि अपने वास्तुकार को खो चुकी एक बेटी की पीड़ा महसूस की।

ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने कहा कि वह जो कुछ भी हैं, जसपाल सर की बदौलत हैं। उन्होंने अनुशासन और जुनून का संतुलन बनाकर आगे बढ़ने की सीख दी। राणा के मार्गदर्शन में ही भाकर ने 2024 पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। वह शूटिंग में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। मनु की मां डॉक्टर सुमेधा भाकर ने कहा कि मनु को अपने गुरु की असमय मृत्यु से बहुत दुख पहुंचा है। हम दोनों देहरादून में हैं। मनु ने हाल ही में विश्व कप के लिए अपने ट्रायल पूरे किए हैं और राष्ट्रीय शिविर में प्रशिक्षण ले रही हैं।

18 साल की उम्र में मिला था अर्जुन अवॉर्ड
जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स को मिलाकर कुल 23 मेडल अपने नाम किए थे। इनमें एशियन गेम्स में 4 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मिलाकर कुल 8 मेडल थे। कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 9 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज को मिलाकर कुल 15 मेडल जीते थे। उन्हें 18 साल की उम्र में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

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