भूल से भी कभी ना करना इन वस्तुओं का दान, वरना हमेशा के लिए हो जाओगे बर्बाद..

भारतीय संस्कृति में दान की हमेशा से ही बेहद महत्ता रही है। किसी समय में दान दक्षिणा भारतीय संस्कृति का आधार स्तंभ हुआ करते थे। दान को लेकर कई प्रकार के नियम थे और यह कई वर्गों में बांटे गये थे।
भारतीय धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, दान से इंद्रिय भोगों के प्रति आसक्ति छूटती है। मन की ग्रंथियां खुलती है जिससे मृत्युकाल में लाभ मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु आए इससे पूर्व सारी गांठें खोलना जरूरी है, जो जीवन की आपाधापी के चलते बंध गई है।
दूसरे शब्दों में जहा जाय तो जीवन भर किए गए दुष्कर्मों से मुक्त होने के लिए दान ही सबसे सरल और उत्तम माध्यम माना गया है। यही कारण है कि, दान का इतिहास हमें हर युग में देखने को मिलता है।
धरती के सबसे प्राचीन ग्रंथ  वेदों, उपनिषदों एवं पुराणों में भी दान के महत्व का वर्णन किया गया है। यही कारण है कि लाखों वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति में आज भी विभिन्न वस्तुओं को दान करने के लिए उनसे जुड़े संस्कारों का पालन किया जाता है।
किया आज्ञा दान फलित हो और अच्छे परिणाम दे इसलिए भारतवर्ष में  दान कर्म ज्योतिषीय उपायों को मद्देनज़र देख कर किए जाते हैं। हम आपको आज दान और उसे किस प्रकार करें इसी के बारे में बता रहे हैं :
ज्योतिष शास्त्र में दान का महत्व
दान किस प्रकार का किया जाय इसपर हम ज्योतिषियों के सलाह ले सकते हैं।  ज्योतिषियों द्वारा किसी व्यक्ति विशेष की जन्म पत्रिका का आंकलन करने के बाद, जीवन में सुख, समृद्धि एवं अन्य इच्छाओं की पूर्ति हेतु दान कर्म करने की सलाह दी जाती है। दान किसी वस्तु का, भोजन का, और यहां तक कि महंगे आभूषणों का भी किया जाता है।
दान कर्म
आपने यह तो अवश्य ही सुना होगा कि जन्म कुण्डली के विभिन्न ग्रहों को शांत करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के दान कर्म किए जाते हैं। जैसा हमें ज्योतिषी बताते हैं हम उसी अनुसार वस्तुओं का दान करते हैं। लेकिन क्या कभी किसी ज्योतिषी ने आपको बताया है कि किस समय कैसा दान नहीं करना चाहिए?
ग्रहों की मजबूत के लिए
जन्म कुण्डली में कुछ ग्रहों को मजबूत एवं दुष्ट ग्रहों को शांत करने के लिए तो हम दान-पुण्य करते ही हैं, लेकिन ग्रहों की कैसी स्थिति में हमें कैसा दान नहीं करना चाहिए, यह भी जानने योग्य बात है।
ऐसा दान ना करें
क्योंकि ग्रहों की स्थिति के विपरीत यदि दान कर्म किया जाए, तो वह और भी बुरा असर देता है। ऐसे में हमारे द्वारा किया गया दान हमें अच्छा फल देने की बजाय, बुरा फल देना आरंभ कर देता है और हमें इस बात की जानकारी भी नहीं होती।

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