बड़े किस्‍मत वाले हैं 1960 से 1995 तक के बीच जन्‍म लेने वाले बच्‍चे

किस्‍मत वाले बच्‍चे – इस धरती पर जन्‍म लेने वाले हर व्‍यक्‍ति का लेखा-जोखा भगवान रखते हैं।

कहते हैं कि जिस दिन बच्‍चा जन्‍म लेता है उसी दिन उसकी मृत्‍यु की तारीख निश्‍चित हो जाती है। हम जो मेहनत करते हैं उसका फल हमें जरूर मिलता है लेकिन जिन लोगों का जन्‍म 1960 से लेकर 1995 के बीच हुआ था वो लोग बहुत ज्‍यादा खुशनसीब और किस्‍मत वाले बच्‍चे हैं। हममें से ज्‍यादातर लोग इसी कैटिगरी में आते हैं जिनका जनम 1960 से 1995 के बीच हुआ था।

बड़े किस्‍मत वाले हैं 1960 से 1995 तक के बीच जन्‍म लेने वाले बच्‍चेअपने बचपन में हमने खूब मस्‍ती की और हम बहुत सारी ऐसी चीज़ों का इस्‍तेमाल कर चुके हैं जो अभी सोचें तो बहुत हंसी आती हैं। उन सभी चीज़ों और खेलों की याद तो आपको भी आती होगी। आज हम आपको आपके बचपन की मस्‍ती की ही याद दिलाने जा रहे हैं।

वो किस्‍मत वाले बच्‍चे –

– बचपन में हम सभी को पारले की टॉफी बहुत पसंद होती थी। उन दिनों में पारले की टॉफी 50 पैसे में 4 आती थीं जबकि आज तो एक टॉफी भी एक रुपए की है।

– बचपन की बात हो और मोहल्‍ले में आने वाली आइस कैंडी का जिक्र ना हो, ऐसा कैसे हो सकता है। कांच की बोतल देकर कई सारी आइस कैंडी ले लिया करते थे।

– बचपन की और एक बात, जब हमारी साइकिल खराब हो जाती थी और उस साइकिल की टायर से हम गली-गली में उसे धक्‍के मार कर खेलते रहते थे तो कितना मज़ा आता था।

– उस समय महीने की पॉकेट मनी नहीं हुआ करती थी और हमें बस एक रुपया ही मिला करता था। ये रुपया मिलते ही कम भागकर दुकान जाते थे और वहां सफेद कलर की कागज में लिपटी हुई चॉकलेट लाते थे। ये मन को कुछ ज्‍यादा खुशी देती थी।

हम सभी पर, किस्‍मत वाले बच्‍चे पर, एक बचपन की शायरी फिट होती है, ज़रा आप भी देखिए  –

रोने की वजह भी ना थी

ना हंसने का बहाना था

क्‍यों हो गए हम इतने बड़े

इससे अच्‍छा तो वो बचपन का ज़माना था…

अब आप सोच रहे होंगें कि अपने बचपन में इतना क्‍या खास था तो आपको बता दूं कि जैसा बचपन आपने और हमने जिया है वो आजकल के बच्‍चों को मिल पाना असंभव है। जहां पहले हम बचपन में बाहर खेला करते थे वहीं अब बच्‍चे घर में बैठकर या तो पढ़ाई करते हैं या फिर इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट्स से खेलते हैं।

जी हां, ये इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट्स ने बच्‍चों का पूरा बचपन ही खराब कर दिया है। उन्‍हें ना तो टॉफी चॉकलेट में दिलचस्‍पी है और ना ही बाहर जाकर खेलने में। इस तरह उनका बचपन हमारे समय की तरह मौज-मस्‍ती भरा नहीं रहा है।

आप खुद ही सोचिए कि क्‍या आपके बच्‍चे वैसा बचपन जीते हैं जैसा आपको मिला था। उस समय ना तो इंटरनेट था और ना ही किसी तरह के कोई गैजेट आए थे इसलिए बच्‍चे बाहर घूमते थे, खेलते थे और मौज-मस्‍ती करते थे। अब तो बच्‍चे फास्‍टफूड खाते हैं और ये उनमें कई तरह की बीमारियों की वजह बन रहा है।

किस्‍मत वाले बच्‍चे – कुल मिलाकर 1960 से 1995 तक के बीच जन्‍म लेने वाले बच्‍चों का बचपन मज़ेदार औैर अठखेलियों से भरा था जो अब कम ही देखने को मिलता है।

 
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