बोर्ड ने लंगर संगठनों को 21 जून से पहले कश्मीर में प्रवेश पर लगा दी रोक

श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने अजीबोगरीब फैसला लिया है। बोर्ड ने लंगर संगठनों को 21 जून से पहले कश्मीर में प्रवेश पर रोक लगा दी है, जबकि एक जुलाई से यात्रा शुरू हो रही है। इसका पंजाब में विरोध भी शुरू हो गया है। लंगर संगठनों का कहना है कि पिस्सू टॉप, चंदनवाड़ी सहित कई ऊपरी इलाकों में लंगर की सामग्री पहुंचाने में एक माह लग जाता है। बोर्ड उन्हें सिर्फ दस दिन पहले प्रवेश की अनुमति दे रहा है, जो सरासर गलत है।
श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) उमंग नरूला का कहना है कि लंगर लगाने वाले 21 जून से पहले लखनपुर से राज्य में प्रवेश तो कर सकते हैं, लेकिन उन्हें 21 जून को ही जवाहर टनल (कश्मीर) क्रॉस करने दी जाएगी। उन्होंने तर्क दिया कि अभी यात्रा मार्ग पर बर्फ जमा है जिसे हटाने का काम जारी है। वहीं यात्रा मार्ग पर लंगर लगाने वाली पंजाब की संस्थाओं श्री अमरनाथ-बी ट्रस्ट, जालंधर, श्री अमरनाथ यात्र संघ, जालंधर, श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन लुधियाना, हरि ओम सेवा मंडल पटियाला ने बोर्ड के फरमान का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इस तरह का आदेश जारी कर बोर्ड क्या साबित करना चाहता है। इस फैसले को वापस लिया जाए। यात्रा मार्ग पर ज्यादातर लंगर लगाने वाले पंजाब से होते हैं।
यात्रा मार्ग पर राशन पहुंचने में हो सकती है देरी
श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन के प्रधान विजय ठाकुर ने बताया कि 21 जून को राज्य में लंगरों के सामान के ट्रकों को कश्मीर में प्रवेश करने की इजाजत देने पर उन्हें बहुत कम समय मिलेगा। कई बार जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग भूस्खलन से बंद हो जाता है। सुरक्षा के मद्देनजर चेकिंग में भी समय लगता है। ऐसे में पहलगाम और बालटाल से आगे यात्रा मार्ग पर राशन का सामान पहुंचाने में समय लगता है। हम चाहते हैं कि 21 जून से चार-पांच दिन पहले कश्मीर पहुंच जाएं ताकि यात्रा मार्ग और पवित्र गुफा तक राशन व अन्य सामान को पहुंचाया जा सके। दो जून को चंडीगढ़ में हमारे संगठन की बैठक हो रही है, जिसमें इस पर विचार विमर्श किया जाएगा, लेकिन बोर्ड का फैसला हमें मंजूर नहीं।
जम्मू संभाग में 105 लंगर स्थापित किए जाएंगे
जम्मू संभाग में 105 लंगर स्थापित किए जाएंगे। इनमें से 17 जम्मू, आठ कठुआ जिले, 10 ऊधमपुर जिले और 28 रामबन जिले में होंगे। हाईवे पर यात्रियों के लिए कठुआ में छह, जम्मू में 17, ऊधमपुर में 26 व रामबन में 22 जगहों पर रुकने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा कश्मीर में भी लंगर लगाए जाएंगे।
एक लाख से अधिक श्रद्धालु करवा चुके एडवांस पंजीकरण
यात्रा एक जुलाई से शुरू हो रही है। 46 दिन की यह यात्रा 15 अगस्त को संपन्न होगी। अभी तक एक लाख से अधिक श्रद्धालु एडवांस पंजीकरण करवा चुके हैं। यात्रा पर आने वाले लाखों भक्तों के खाने का प्रबंध लंगर वाले ही करते हैं।
सरकारी फरमान का चौतरफा हो रहा है विरोध
एक जुलाई से शुरू होने जा रही श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान लंगर लगाने वाली संस्थाओं को 21 जून से पहले कश्मीर में प्रवेश पर रोक का पंजाब की संस्थाओं ने विरोध किया है। संस्थाओं द्वारा इस फैसले को वापस लेने की मांग की गई है। लंगर लगाने लगाने वालों का कहना है कि पिस्सू टॉप, चंदनवाड़ी सहित कई इलाकों में लंगर की सामग्री पहुंचाने में ही एक माह लग जाता है।
आठ दिन में राशन की ढुलाई संभव नहीं
- नए नियमों के कारण गुफा के नजदीक लंगर लगाने वाली संस्थाओं को परेशानी होगी। मात्र आठ-नौ दिनों में लंगर के राशन की ढुलाई कर पाना संभव न होगा। गुफा के नजदीक कई लंगर पूरी यात्रा तक चलते हैं। इसके लिए काफी ज्यादा राशन की जरूरत होती है। सीमित समय में राशन पहुंचाना संभव नहीं होगा। सरकार को उक्त फैसला वापस लेना चाहिए। – जतिंदर अरोड़ा, श्री अमरनाथ यात्रा संघ, जालंधर
परेशानी बढ़ाने वाला फरमान वापस ले सरकार
- बालटाल व पंचतरणी तक लंगर लगाने के लिए तो गाड़ियों में सामान पहुंच जाता है, लेकिन पिस्सू टॉप, चंदनवाड़ी तथा शेषनाग में लंगर लगाने वाली संस्थाओं के लिए यह परेशानी वाला फरमान है। इन जगहों पर केवल घोड़ों से ही सामान पहुंचा पाना संभव होता है। यही कारण है कि इन जगहों पर लंगर लगाने वाली संस्थाएं एक माह पहले से ही सामान भेजना शुरू कर देती हैं। इन संस्थाओं की मदद करने की बजाए नए फरमान जारी करके उनकी परेशानी बढ़ाई जा रही है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार को उक्त फैसला जल्द से जल्द वापस लेना चाहिए। -भारत भूषण अग्रवाल, प्रधान श्री अमरनाथ ‘बी’ ट्रस्ट, जालंधर
15 जून से पहुंचने की इजाजत दी जाए
- इतने कम समय में भंडारे की तैयारियां करना असंभव है। हमने श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सीईओ उमंग नरूला को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि 21 जून की बजाए उन्हें 15 जून से पहुंचने की इजाजत दी जाए, ताकि भंडारे की सभी तैयारियां हो सकें। हमने यह भी कहा है कि यदि भंडारे की तैयारियां समय पर नहीं होती तो इसके लिए श्राइन बोर्ड ही जिम्मेदार होगा। -राजन गुप्ता, जनरल सेक्रेटरी, श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन, लुधियाना
भंडारे का शेड्यूल बदलना पड़ेगा
- सरकार का आदेश मानना अब मजबूरी है। लंगर लगाने के लिए कश्मीर जाने का 15 जून को प्रोग्राम था, जिसे अब बदलना पड़ेगा। अब लंगर के लिए जाने वाले ट्रकों को 20 जून को लेकर जाएंगे। कोई खास परेशानी नहीं होगी, क्योंकि यात्रा एक जुलाई से शुरू होनी है। ऐसे में लंगर भी 30 जून को ही शुरू कर सकते हैं। 21 जून के बाद भी लंगर संस्थाओं के पास पर्याप्त समय है। -जतिंदर जिम्मी, हरि ओम सेवा मंडल पटियाला





