बैंकों के फंसे कर्ज और बढ़ने के आसार

bank-npa_14_05_2016नई दिल्ली। फंसे कर्जों (एनपीए) के बढ़ते स्तर ने अर्थव्यवस्था को सुस्ती के चंगुल में ले रखा है। चालू वित्त वर्ष में इनके और बढ़ने की आशंका है। वित्त मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट की मानें तो मार्च, 2017 तक बैंकों का सकल एनपीए बढ़कर 6.9 फीसद हो सकता है।

आरबीआइ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर, 2015 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल एनपीए 5.14 फीसद था। सितंबर, 2016 तक इसके बढ़कर 5.4 फीसद हो जाने की आशंका है।

मंत्रालय की 2015-16 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि आर्थिक स्थितियां व्यापक स्तर पर बिगड़ती हैं, तो सकल एनपीए का अनुपात और बढ़ सकता है। अत्यधिक दबाव की स्थितियों में मार्च 2017 तक यह 6.9 फीसद के आसपास पहुंच सकता है।

इसमें कहा गया है कि जोखिम वाली परिसंपत्तियों की तुलना में पूंजी अनुपात (सीआरएआर) मार्च 2017 तक घटकर 10.4 फीसद हो सकता है। सितंबर, 2015 में यह 12.7 फीसद था। सीआरएआर बैंकों की पूंजी पर्याप्तता का संकेतक है।

रिपोर्ट के अनुसार फंसे कर्जों के बढ़ने की मुख्य वजहों में बीते कुछ समय के दौरान घरेलू ग्रोथ में सुस्ती, ग्लोबल इकोनॉमी में सुधार की धीमी रफ्तार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता शामिल हैं। इसके कारण टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, चमड़ा, रत्न जैसे विभिन्न उत्पादों का निर्यात कम हुआ।

बाहरी कारकों के अलावा खनन परियोजनाओं पर प्रतिबंध, पावर और स्टील सेक्टर में परियोजनाओं को मंजूरी में विलंब, कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता और बिजली की किल्लत के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में ऑपरेशनों का प्रभावित होना भी बैंकों पर भारी पड़ा। बीते कुछ समय में इन सेक्टरों में बैंकों ने जोरदार तरीके से फंडिंग की।

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को कर्ज सरकारी बैंकों के लिए काफी तकलीफदेह रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि फंसे कर्जों की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं। इसी क्रम में वह छह नए कर्ज वसूली ट्रिब्यूनल गठित कर रही है। ये फंसे कर्जों की वसूली में मदद करेंगे।

बैंकों के फंसे कर्जों में 2000-01 से 2008-09 तक लगातार गिरावट आई। इस दौरान ये 12.04 फीसद से घटकर 2.45 फीसद रह गए। रिपोर्ट के अनुसार मार्च, 2013 से मार्च 2014 तक सकल एनपीए में बढ़ोतरी हुई। इस दौरान ये 3.42 फीसद से बढ़कर 4.11 फीसद हो गए। सितंबर, 2015 में इनका स्तर और बढ़कर 5.14 फीसद पर आ गया।

बीमा क्षेत्र में 2566 करोड़ रुपये विदेशी निवेश

सरकार द्वारा बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) की सीमा 26 फीसद से बढ़ाकर 49 फीसद किए जाने के बाद छह कंपनियों में नया विदेशी निवेश आया है। फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआइपीबी) ने फरवरी तक इन कंपनियों में 2566 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी।

वित्त मंत्रालय की वर्ष 2015-16 की सालाना रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। लंबी बहस और वामपंथी दलों के कड़े विरोध के बाद संसद ने मार्च 2015 में इंश्योरेंस एक्ट में संशोधन करके एफडीआइ की सीमा बढ़ाई गई थी।

एक्ट में बदलाव के बाद सरकार ने 26 फीसद एफडीआइ ऑटोमेटिक रूट से और इसके बाद 49 फीसद एफडीआइ एफआइपीबी की मंजूरी के बाद करने की अनुमति दी। इसके बाद सरकार ने नियमों में और रियायत देते हुए मार्च 2016 में 49 फीसद तक एफडीआइ ऑटोमेटिक रूप से लाने की अनुमति दे दी।

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