बुझ गया अवध के आख़री बादशाह के घर का चिराग

प्रमुख संवाददाता
लखनऊ. अवध के आख़री बादशाह नवाब वाजिद अली शाह के परपौत्र प्रिंस कौकब कद्र का रविवार की रात कोलकाता में निधन हो गया. पांच दिन पहले वह कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे. वह 87 साल के थे और कोलकाता के मटियाबुर्ज इलाके में रहते थे.
ब्रिटिशर्स ने जब लखनऊ पर कब्ज़ा कर लिया तो नवाब वाजिद अली शाह को एक लाख रुपये महीने की पेंशन देकर कोलकाता शिफ्ट कर दिया. नवाब वाजिद अली शाह ने मटियाबुर्ज इलाके में एक छोटा लखनऊ बसाया. लखनऊ के सिब्तैनाबाद इमामबाड़े की तरह से वहां भी सिब्तैनाबाद इमामबाड़ा बनाया.

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नवाब वाजिद अली शाह तो लखनऊ छोड़कर कोलकाता चले गए लेकिन उनकी पत्नी बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. जंग के दौरान उनका बेटा बिर्जीस कद्र बहुत छोटा था. बेगम हजरत महल उन्हें अपनी पीठ पर बांधकर जंग करती थीं. नवाब बिर्जीस कद्र के बेटे थे प्रिंस मेहर कद्र. और इनके बेटे थे प्रिंस कौकब कद्र.
प्रिंस कौकब कद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उर्दू में पीएचडी किया था. वर्ष 1993 में वह अलीगढ़ विश्वविद्यालय से उर्दू के प्रोफ़ेसर पद से रिटायर हुए थे. साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. वह बिलियर्ड्स एंड स्नूकर फेडरेशन ऑफ़ इंडिया, वेस्ट बंगाल बिलियर्ड्स एसोसियेशन और उत्तर प्रदेश बिलियर्ड्स एंड स्नूकर एसोसियेशन के संस्थापक सचिव थे.
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प्रिंस कौकब कद्र कोलकाता में रहते थे लेकिन लखनऊ से उनका लगातार रिश्ता बना रहा. कुछ साल पहले वह लखनऊ आये थे नवाब वाजिद अली शाह और बेगम हजरत महल से जुड़ी तमाम बातें उन्होंने साझा की थीं. उनके परिवार में दो बेटे और चार बेटियां हैं. कोलकाता के सिब्तैनाबाद इमामबाड़े के वह ट्रस्टी भी थे. इसी इमामबाड़े में नवाब वाजिद अली शाह की कब्र है.

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