बुंदेलखंड क्षेत्र में बेसहारा जानवरों की समस्या बढऩे लगी, किसान सड़क पर प्रदर्शन करने को मजबूर

बुंदेलखंड क्षेत्र में बेसहारा जानवरों की समस्या बढऩे लगी है और किसान सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर हो रहे हैं। सोमवार सुबह चित्रकूट के खपटिहा गांव और उरई के बंगरा गांव में ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में बेसहारा जानवरों को घेर कर विद्यालय परिसर में बंद कर दिया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान स्कूल आए छात्र व शिक्षक दहशत में आ गए। वहीं जानकारी होते ही पुलिस भी पहुंच गई और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया।

चित्रकूट में ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा
चित्रकूट के खपटिहा ग्राम पंचायत में बेसहारा जानवरों के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। गोशाला नहीं होने से रोजाना जानवरों का झुंड दर्जनों बीघा फसल चौपट कर रहे हैं। सोमवार सुबह फसल नष्ट कर रहे जानवरों को देखकर ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। ग्रामीणों ने करीब 200 बेसहारा जानवरों को घेरकर खदेड़ते हुए पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बंद कर दिया। सुबह स्कूल पहुंच रहे बच्चे दहशत में आ गए। ग्रामीणों का कहना है कि फसल नष्ट होने से बच्चे व परिवार भूखों मरने की स्थिति में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देश के बावजूद बेसहारा जानवरों के लिए प्रशासन कोई इंतजाम नहीं कर रहा है। एसडीएम मऊ रमेश यादव ने बताया कि तहसीलदार को भेजकर रिपोर्ट ली जाएगी, जल्द किसानों की समस्या हल होगी।

125 अस्थायी पशु आश्रय केंद्र बदहाली का शिकार
चित्रकूट में लोकसभा चुनाव से पहले पांच ब्लॉकों में 125 पशु आश्रय केंद्र बनाए गए थे। इनमें करीब 15,966 जानवरउरई जिले में रोजाना कहीं न कहीं बेसहारा जानवरों का झुंड कई बीघा फसल चट कर रहे हैं। फसल नुकसान को लेकर किसान भी आजिज आ गए हैं। बंगरा गांव के पास ग्रामीणों ने प्राथमिक स्कूल का ताला तोड़कर बड़ी संख्या में बेसहारा जानवरों को बंद कर दिया और लाठी-डंडा लेकर गेट पर बैठ गए। सुबह स्कूल पहुंचे बच्चों व शिक्षकों ने नजारा देखा तो अफरातफरी मच गई। शिक्षकों ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। किसानों का कहना है कि रातभर जत्थे में जानवरों से फसल बचाने के लिए मशक्कत करते हैं।  रखे गए थे, अब वही जानवर केंद्रों से बाहर घूम रहे हैं। इसका कारण पशु आश्रय केंद्र में चारा पानी का उचित इंतजाम नहीं होना है।

कई बार गोशाला निर्माण कर निजात दिलाने की मांग की जा चुकी है लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। जबतक समस्या का समाधान नहीं होता है, वह लोग जानवरों को स्कूल से नहीं निकलने देंगे। उधर, स्कूल परिसर में बंद एक गोवंश की मौत हो गई है। ग्रामीण किसी भी कीमत पर जानवरों को बाहर निकालने के लिए राजी नहीं है और किसी को स्कूल के अंदर नहीं जाने दे रहे हैं।

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