बिहार के नए राज्यपाल के बारे में जानें; मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई गवर्नर अता हसनैन को शपथ

बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने शपथ ली। सेना से सेवानिवृत सैयद अता हसनैन कुशल रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं।

बिहार के नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने शपथ ले लिया है। उन्होंने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन ने शपथ दिलाई। शनिवार सुबह बिहार लोकभवन (राजभवन) में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया था। इस समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा समेत कई मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। सेना से सेवानिवृत सैयद अता हसनैन कुशल रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं। 40 साल उन्होंने भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दी। जम्मू कश्मीर में शांति बहाली और आतंकवद पर लगाम लगाने में उन्होंने काफी अहम भूमिका निभाई। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था तथा नागरिक-सैन्य संबंधों को बेहतर बनाने में योगदान दिया।

कहां से पढ़े, सेना में कैसे आए?
सैयद अता हसनैन का जन्म वर्ष 1952 में एक सैन्य परिवार में हुआ। उनके पिता मेजर जनरल सैयद मेंहदी हसनैन भी भारतीय सेना में उच्च पद पर रहे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 1972 में इतिहास विषय में स्नातक (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की। आगे चलकर उन्होंने सुरक्षा और रणनीति से जुड़े अध्ययन के लिए लंदन भी गए। अपनी पढ़ाई पूरी करने बाद सैयद हसनैन ने 16 जून 1974 को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी से उन्हें भारतीय सेना में कमीशन मिला और उनकी नियुक्ति गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन में हुई। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने श्रीलंका में ऑपरेशन पवन में भाग लिया और पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशनों के तहत मोजाम्बिक और रवांडा में भी अपनी सेवाएं दीं।

कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई
सैयद अता हसनैन ने सेना में रहते हुए कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई। ब्रिगेडियर के रूप में उन्होंने उरी क्षेत्र में 12वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली। इसके बाद मेजर जनरल के रूप में बारामूला स्थित 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन का नेतृत्व किया। लेफ्टिनेंट जनरल बनने के बाद उन्हें भोपाल में XXI कोर का जनरल ऑफिसर कमांडिंग बनाया गया। वर्ष 2010 में वे कश्मीर में XV कोर के कमांडर बने। यहीं पर उन्होंने ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ के माध्यम से स्थानीय लोगों और सेना के बीच भरोसा मजबूत करने की पहल की।

2018 में कुलाधिपति बने
30 जून 2013 को सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी सैयद अता हसनैन रणनीतिक और सुरक्षा मामलों में सक्रिय रहे। वर्ष 2018 में उन्हें सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर का कुलाधिपति नियुक्त किया गया, जबकि 2020 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का सदस्य बनाया गया। इतना ही नहीं अपने उत्कृष्ट सैन्य नेतृत्व और सेवाओं के लिए सैयद अता हसनैन परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान भी पा चुके हैं।

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