फेसबुक विवाद : क्या विपक्ष की मांग पर सरकार करेगी विचार ?

जुबिली न्यूज डेस्क
बीते दिनों फेसबुक को लेकर वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक खुलासा हुआ जिसके बाद से फेसबुक निशाने पर आ गई है। देश की कई राजनीतिक पार्टियों ने इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच की मांग की है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने आरोप लगाया था कि फेसबुक बीजेपी के कुछ नेताओं को लेकर हेट स्पीच के नियमों को लागू नहीं करती।
रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक की भारत में टॉप पब्लिक पॉलिसी कार्यकारिणी ने सत्ताधारी बीजेपी से जुड़े कम से कम 4 व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ ‘घृणा संदेश के नियम लागू करने का विरोध किया है’ । रिपोर्ट में कहा गया है कि तथ्य यह है कि ये व्यक्ति या संगठन हिंसा भड़काने में लगे थे।
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रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र हैं कि फेसबुक ने ऐसा बिजनेस को नुकसान पहुंचने की संभावनाओं को देखते हुए किया है। रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी निदेशक अंखी दास ने अपने स्टाफ को कथित तौर पर बताया है कि भाजपा नेताओं को हिंसा के लिए दंडित करने से ‘कंपनी की भारत में बिजनेस संभावनाओं को नुकसान हो सकता है।’
इस खुलासे के बाद से फेसबुक पर सवाल उठने लगा। विपक्षी दलों ने भी इस पर सवाल उठाया और इसकी जांच की मांग की है। कांग्रेस ने कहा है कि फेसबुक द्वारा घृणा से भरी सामग्री के खिलाफ ‘कार्रवाई नहीं करने’ से भारत में ‘लोकतंत्र अस्थिर’ हो रहा है और यह कि वह विभिन्न देशों में विभिन्न नियम लागू कर रही है, ‘बिल्कुल अस्वीकार्य है।’
इस मामले में बीजेपी के पूर्व महासचिव और आरएसएस विचारक केएन गोविंदाचार्य ने कहा है कि डेटा संप्रुता और गोपनीयता के अधिकार के मामले में राजनीतिक दलों को मतभेदों को दरकिनार करके समाधान तलाशने की जरूरत है।
गोविंदाचार्य ने कहा, ”कांग्रेस की ओर से की जा रही जेपीसी जांच की मांग को मूलभूत और प्रणालीगत समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाए।” उन्होंने कहा, ”एक दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय राजनीतिक दल जवाबदेही के मूल प्रश्न और जरूरी कानून बनाने पर ध्यान दें तो बेहतर होगा। पार्टियां सत्ता में रहने पर एक भाषा बोलती हैं और विपक्ष में रहने पर दूसरी।”

 
हालांकि फेसबुक ने जोर देकर कहा कि उसकी नीतियां वैश्विक रूप से बिना राजनीतिक जुड़ाव देखे लागू की जाती हैं। फेसबुक ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कंपनी के सोशल मीडिया मंच पर नफरत या द्वेष फैलाने वालों ऐसे भाषणों और सामग्री पर अंकुश लगाया जाता है, जिनसे हिंसा फैलने की आशंका रहती है। कंपनी ने कहा कि उसकी ये नीतियां वैश्विक स्तर पर लागू की जाती हैं और इसमें यह नहीं देखा जाता कि यह किस राजनीतिक दल से संबंधित मामला है।
इस विवाद के बीच भारत में फेसबुक की वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी आंखी दास ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि इस खबर के बाद उन्हें ”जान से मारने की धमकी मिल रही है और उन्हें जानबूझकर बदनाम किया गया है।
वहीं इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि समिति रिपोर्ट के बारे में फेसबुक का पक्ष जानना चाहेगी। उसके बाद दिल्ली विधानसभा की एक समिति ने भी कहा कि भारत में नफरत भरी सामग्री पर अंकुश लगाने में जानबूझकर निष्क्रियता बरतने की शिकायतों को लेकर वह दास समेत फेसबुक के अधिकारियों को तलब करेगी।
कांग्रेस की मांग से इत्तेफाक जताते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की बात कही है।
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वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भारत दुनिया में सबसे संपन्न लोकतंत्र है और कोई भी संगठन लोकतांत्रिक जड़ों को कमजोर करता है तो उससे सवाल पूछा जाएगा। उसकी जवाबदेही बनेगी।
श्रीनेत ने आरोप लगाया कि ”पूरी जिम्मेदारी से मैं यह कहूंगी कि फेसबुक जो कर रहा है वो भारत की जड़ों को कमजोर कर रहा है। अक्सर कोई कार्रवाई नहीं की जाती और उससे भी बुरा यह है कि संज्ञान में लाए जाने के बावजूद वह द्वेषपूर्ण सामग्री को अपने मंच से नहीं हटाता है।”
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