फतेहपुर : जिला अस्पताल का हाल-बेहाल, डॉक्टर को अस्पताल से ज्यादा नर्सिंगहोम से मोह

फतेहपुर। कोविड-19 को लेकर अस्पताल में वैसे भी रोगियों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। इसमें भी सरकारी चिकित्सकों का नर्सिंग होम प्रेम और बाधक साबित हो रहा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. प्रभाकर ऐसे चिकित्सकों को खुली छूट दिये हुयें हैं, जो उनके लिये कमाऊपूत साबित हो रहे हैं। अस्पताल सूत्रों की माने तो एनेस्थीया विभाग का एक चिकित्सक अस्पताल आने से अधिक घूम-घूम कर नर्सिंगहोमों में अपनी सेवायें देने सालों से मशगूल है, जबकि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का चहेता है। चिकित्सकों की लगने वाली इमरजेंसी ड्यूटी भी इसी चिकित्सक की जिम्मेदारी में डाल दी गयी है, जिससे ख्ुाद तो माह में दो ड्यूटी भी नहीं करता और सीएमएव की जी हुजूरी न करने वालों की सबसे अधिक ड्यूटी लगा कर उनका मानसिक शोषण भी अधिकारी के इशारे पर जारी है।
जिला अस्पताल की हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। कोविड-19 के नाम पर कहीं भी आने वाले रोगियों के लिये सेनेटाइजर आदि की व्यवस्था नहीं नजर आती है। विभागीय चिमित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की माने तो सेनेटाइजर उन्हें खुद भी अस्पताल से कभी-कभार ही मिलता है। मास्क के नाम पर सप्ताह में एक बार ही कपड़े का मास्क दिया जाता है। यहां तक कि यूज एण्ड़ थ्रो वाले मास्क भी इन लोगों को तीन-तीन लगाने पड़ते हैं। आने वाले रोगियों की बात करें तो कुछ ही गिने-चुने चिकित्सक अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिये उन्हें देखते और इलाज करते हैं, लेकिन सीएमएस के कमाऊपूत बने चिकित्सकों के लिये न तो रोगी देखने की पाबंदी है और न ही इलाज करने की हिदायत दी जाती है।
नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ चिकित्सकों ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुविधाओं के लिये जिम्मेदार कुछ भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। यहां तक कि अगर किसी ने कोई बात कही तो उल्टे अधिकारी के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है। हालत ऐसे होते जा रहे हैं कि गरीबों को निःशुल्क इलाज का दावा करने वाले अस्पताल के चिकित्सकों का रूझान अस्पताल से अधिक नर्सिंग होमों में सेवायें देने में रहता है। सूत्र बतातें हैं कि जिला अस्पताल में तैनात एक एनेस्थीसिया चिकित्सक अब तो नर्सिंगहोम में जाने वाले चिकित्सक बिना उसकी मर्जी के काम नहीं कर सकते हैं। अस्पताल सूत्रों की माने तो जो चिकित्सक अपने काम से काम रखते हैं उन्हें सीएमएस के कोपभाजन का शिकार बनाने में इसकी महती भूमिका रहती है।





