पितृपक्ष में बन जाओगे कंगाल अगर करोगे ऐसे काम

otherwise you can become a victim of pitru.
श्राद्ध पक्ष के दौरान बहुत सी सावधानियां बरतनी आवश्यक है अन्यथा आप पितृ-दोष का शिकार बन सकते हैं। पितृदेव रुष्ट होते हैं तो आपको कंगाली या कई बाधाओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
शास्त्रों के अनुसार सभी पितर धरती पर आगमन करते हैं। उनके लिए तर्पण या श्राद्ध किया जाता है, जिससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। आपके द्वारा किया गया श्राद्ध ना केवल आपके पितरों को, सभी पितरों के लिए मोक्ष प्राप्ति के द्वार खोलता है।
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पितृ पक्ष में खाने, कपड़े पहननेऔर पूजा पाठ तक में कई सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। कई लोग कुछ ऐसा कर देते हैं जिसे शास्त्रों में निषेध माना गया है।
पितृ पक्ष बरते सावधानियां
आप रोजाना भी तर्पण और ब्राह्मण को भोजन करा सकते हैं। पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करना इसलिए अनिवार्य बताया गया है क्योंकि इससे उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। अगर आपको उनकी मृत्यु की तिथि याद नहीं भी है तो सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के दिन भी तर्पण कर सकते हैं।
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पितृ पक्ष के दौरान इस दौरान किसी भी भिक्षुक, अतिथि या कोइ भी आगंतुक आए उसका आदर करे। आपके द्वार पर आने वाले किसी भी अतिथि का अनादर ना करें। इन 16 दिनों में हो सकता है आपके पितर कोई रूप धारण कर आपके द्वार पर खड़े हो जाएं।
इस दौरान किसी भी जीव को परेशान ना करें, अन्यथा आपके पितृजन आपसे नाराज हो सकते हैं। आपको पशु-पक्षी को भी भोजन और जल देना चाहिए। इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि गाय को ना तो परेशान करें, आपके द्वारा गाय और ब्राह्मण का अपमान ना हो।
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कई लोगों को बासी खाना खाने की आदत होती है लेकिन पितृपक्ष में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इन 16 दिनों में आप किसी भी प्रकार का बासी खाना ना खाएं।
पितृ पक्ष के दौरान पेड़-पौधे भी ना काटें क्योंकि वे भी सजीव हैं। ऐसा करने से भी पितृ-दोष का सामना करना पड़ता है जो आपके लिए कई संकट ला सकता है।
शास्त्रों में भी काले तिल के महत्व को बताया गया है।तर्पण या श्राद्ध करते समय केवल काले तिल का ही प्रयोग करें। इसके अतिरिक्त यह पूर्वजों को भी अत्यंत प्रिय होता है। पितृ-पक्ष में इस बात का भी ध्यान रखें कि ब्राह्मण को केवल मध्याह्म के समय ही भोजन कराएं।

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