पार्वती से लेकर भक्तों तक शिव जी से प्रेम को समर्पित है ये पवित्र माह…

रुद्राभिषेक का महत्व 

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस माह में विभिन्न विधियों ये शंकर जी की पूजा की जा सकती है। इन्हीं में से है एक उनका रुद्राभिषेक करना। वैसे तो साल में यदि आप आपको रुद्राभिषेक करना हो तो विशेष दिन विचारना पड़ता है। परंतु सावन माह में सभी दिन शिव के होते हैं आैर प्रत्येक दिन उनके रुद्राभिषेक किया जा सकता है।  यानि कभी भी रुद्राभिषेक करके भगवान शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है। अभिषेक के दौरान बेलपत्र, शमीपत्र, कुशा आैर  दूब आदि अर्पण करने से भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं। साथ में इस पूजा में उन्हें  भांग, धतूरा आैर श्रीफल महादेव को समर्पित किए जाते हैं।

पार्वती के प्रेम का प्रतीक 

सावन माह से जुड़ी पौराणिक कथा में बताया गया है देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग करने से पूर्व महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। इसलिए अपने दूसरे जन्म में जब उन्होंने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में जन्म लिया तो सावन महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और शिव को प्रसन्न कर उन्हें पुन प्प्त किया। इसके बाद से ही महादेव के लिए भी सावन अति प्रिय हो गया। 

भक्तों पर शिव की कृपा का महीना 

एक अन्य कथा के अनुसार बताते हैं कि मरकंडू ऋषि के पुत्र मारकण्डेय ने लंबी आयु के लिए सावन माह में ही घोर तप कर शिव की कृपा प्राप्त की थी, आैर उन्हें दीर्घायु मिली थी। इसी तरह ये भी  माना जाता है कि सावन माह में ही समुद्र मंथन किया गया था आैर उससे निकले विष को पीकर शंकर जी ने सृष्टि की रक्षा की थी। यानि ये भक्तों पर उनकी अपार कृपा का महीना भी है। 

खास हैं सावन के सोमवार व्रत 

एेसी भी मान्यता है कि सावन के महीने के सोमवार शिव जी को अत्यंत प्रिय होते हैं। इस दिन उनकी विधि विधान से पूजा करने पर वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं। इस दिन व्रत रखने और उनका ध्यान करने से विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस व्रत में भगवान शिव का पूजन करके एक समय ही भोजन किया जाता है। साथ ही इस दिन गौरी-शंकर रूद्राक्ष धारण करना भी शुभ रहता है।

कांवड़ यात्रा का महीना

सावन के महीने में कांवड़ यात्रा भी होती है। इसमें पवित्र नदियों से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। इस कार्य के लिए भक्तगण, गंगा आैर अन्य नदीयों से जल को मीलों की दूरी तय करके लाते हैं और भगवान शिव का चढ़ाते हैं। इसे कलयुग में की जाने वाली एक प्रकार की तपस्या स्थान दिया गया है, जिसके द्वारा महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास किया जाता है। इस यात्रा के चलते भी ये माह भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है।

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