पाक सेना से बगावत के बाद बनाई BNP, राष्ट्रपति रहते हुई हत्या

 बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया है। वह कई बीमारियों से जूझ रहीं थीं। गौरतलब है कि उनके निधन से कुछ दिन पहले ही उनके बेटे तारिक रहमान 19 साल के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं।

खालिदा जिया को बांग्लादेश की राजनीति में एक अहम शख्सियत के तौर पर देखा जाता रहा है। वह तीन बार देश की प्रधानमंत्री रहीं। लेकिन वह हमेशा से राजनीति में आने के लिए इच्छुक नहीं थीं। उनके पति जिया उर रहमान उन्हें शर्मिली गृहणी कहा करते थे। आइए जानते हैं कि कौन थे जिया-उर-रहमान?

कौन थे जिया उर रहमान?

1960 के दशक में जिया पाकिस्तानी आर्मी में कैप्टन थे। लेकिन 1971 में मुक्ति संग्राम के वक्त जिया-उर-रहमान ने पाकिस्तानी आर्मी से बगावत किया और जंग में हिस्सा लिया।

इसके बाद बांग्लादेश की आजादी के बाद 25 अगस्त 1975 को वह बांग्लादेश सेना प्रमुख बनाए गए। फिर 1977 में वह बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने।

पहले निर्वाचित राष्ट्रपति बने

साल 1978 में जिया ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी बनाई। इसके बाद साल 1979 में पार्टी को शानदार जीत हासिल की। पार्टी को मिली जीत के बाद जिया-उर-रहमान बांग्लादेश के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति बने।

जिया को काफी वक्त से जान का खतरा था। लेकिन बांग्लादेश के इंटेलिजेंस विभाग की ओर से वॉर्निंग के बावजूद जिया चटगांव पहुंचे थे। वहां सेना के ही कुछ अफसरों ने मिलकर उनकी हत्या कर दी थी।

कहा जाता है जिया की हत्या में लेफ्टिनेंट कर्नल मोती उर रहमान की मुख्य भूमिका थी। वह चटगांव के जीओसी मेजर जनरल मोहम्मद अबुल मंजूर के तबादले के बाद गुस्से में थे। इसका अंजाम ये हुआ कि बीएनपी को उसका लीडर खोना पड़ा, इसके बाद बांग्लादेश की राजनीति में खालिदा जिया की एंट्र हुई।

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