पाकिस्तानी कोर्ट में ह्यूमन राइट्स वकीलों को 17 साल की जेल

पाकिस्तानी कोर्ट ने शनिवार, 24 जनवरी को दो ह्यूमन राइट्स वकीलों को 17 साल जेल की सजा सुनाई है। इन वकीलों पर देश की सिक्योरिटी को खतरे में डालने के आरोप लगे थे। इन्हें देश की सिक्योरिटी एजेंसी के लिए खतरा बताया गया।
कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों को आधार मानते हुए जज अफजल माजोका ने यह फैसला सुनाया। वकील जैनब मजारी और उनके पति हादी अली चट्टा की इस्लामाबाद में एक दिन पहले ही गिरफ्तारी हुई।
ह्यूमन राइट्स वकीलों को 17 साल की जेल
पाकिस्तानी कोर्ट में सुनवाई के दौरान वीडियो लिंक के जरिए दोनों पति-पत्नी को पेश किया गया। जैनब मजारी और उनके पति हादी अली चट्टा ने कोर्ट की सुनवाई का बहिष्कार किया।
जैनब और उसके पति के विरोध जाहिर करने के बाद जज अफजल माजोका ने ट्रायल की प्रक्रिया समाप्त कर दोनों को 17 साल की जेल की सजा का फैसला सुनाया।
कोर्ट के फैसले में कहा गया कि मजारी ने पिछले कुछ सालों में कई ट्वीट किए, जिनमें प्रतिबंधित बलूच अलगाववादी समूह और पाकिस्तानी तालिबान के एजेंडे को दिखाया गया था।
यह मामला अगस्त 2025 में नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी में दायर एक शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इस जोड़े ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल राज्य और उसकी सुरक्षा संस्थानों को बदनाम करने के लिए किया है।





