पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता -डाॅ.नीलकण्ठ तिवारी

प्रासाद स्कीम व विश्व बैंक परियोजना से वाराणसी में लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार पर्यटन को एक जनउपयोगी उद्योग के रूप में विकसित और प्रचारित-प्रसारित कराने के लिए शीर्ष प्राथमिकता प्रदान कर रही है, ताकि देश-प्रदेश में प्रभावी पर्यटन संस्कृति विकसित हो सके। इसके साथ ही विकास-रोजगारपरक व पर्यावरण संरक्षित वातावरण का सृजन हो और उससे अधिक से अ​धिक लोग लाभन्वित हो सके। यह बात पर्यटन निदेशालय में शुक्रवार को सारनाथ में पर्यटन विकास की प्रस्तावित योजनाओं से संबंधित बैठक में विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाॅ. नीलकण्ठ तिवारी ने कही। उन्होंने कहा कि सारनाथ की ऐतिहासिक विरासतों और सांस्कृतिक समृद्धि को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सारनाथ में पर्यटन सुविधाओं के ढांचागत एवं अवस्थापना संबंधी कार्यों को कराये जाने एवं पर्यटन सम्भावनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए विशेष रूप से कार्य करने का निर्णय किया है।
डॉ. नीलकण्ठ तिवारी ने कहा कि महात्मा बुद्ध के जीवनकाल से जुड़े महत्वपूर्ण घटना के साक्षी होने के कारण सारनाथ विदेशी तथा स्वदेशी पर्यटकों के मध्य आकर्षण का केन्द्र है। वर्ष 2019 में स्वदेशी पर्यटकों की संख्या 64,47,775 तथा विदेशी पर्यटकों की संख्या 3,50,000 थी। गतवर्ष वाराणसी स्वदेशी पर्यटकों के आगमन के दृष्टि से उत्तर प्रदेश में छठें स्थान पर रहा तथा विदेशी पर्यटकों के आगमन के दृष्टि से उत्तर प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा। डाॅ. तिवारी ने कहा कि भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ी अधिकांश महत्वपूर्ण घटनाएं उत्तर प्रदेश की धरा पर ही सम्पन्न हुई। ज्ञान की प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपने प्रथम ऐतिहासिक उद्बोधन के लिए सारनाथ को स्वयं चुना था। इस कारण सारनाथ बौद्ध परिपथ का एक अभिन्न अंग है तथा इसकी महत्वपूर्ण भूमिका प्रदेश में बौद्ध धर्म को प्रचारित-प्रसारित किए जाने हेतु स्वतः स्पष्ट होती है।
प्रासाद स्कीम तथा विश्व बैंक परियोजना के अन्तर्गत जनपद-वाराणसी में नवीन योजनाएं प्रस्तावित की जा रही है, जिससे लाखों लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, उनके आर्थिक एवं सामाजिक स्तर का उन्नयन होगा तथा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को स्तरीय पर्यटक सुविधायें प्राप्त हो सकेंगी और उनका पर्यटन-अनुभव बेहतर हो सकेगा। बैठक में कहा गया कि सारनाथ में सांस्कृतिक पर्यटन की असीम सम्भावनाएं हैं तथा यहां के अवस्थापना सुविधाओं का उच्चीकरण एवं सौन्दीर्यकरण किए जाने से राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय पर्यटकों को यहां की गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और शिल्प-कला से परिचित कराया जा सकता है तथा उन्हें अधिकाधिक संख्या में प्रदेश के भ्रमण हेतु आने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

 

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