परिवारवाद के आरोपों से जूझ रहे शिअद ने मानसून सत्र के लिए अपनी भूमिका में अहम किया बदलाव….

परिवारवाद के आरोपों से जूझ रहे शिरोमणि अकाली दल ने मानसून सत्र के लिए अपनी भूमिका में अहम बदलाव किया है। शिअद के अध्यक्ष सुखबीर बादल के सांसद बनने के बाद खाली हुई शिअद विधायक दल के नेता की कुर्सी पूर्व वित्त मंत्री व राज्यसभा सदस्य सुखदेव ढींडसा के बेटे परमिंदर सिंह ढींडसा को मिल गई है। वह इससे पहले उपनेता थे।
हालांकि, कहा जा रहा था कि यह पद तेज तर्रार नेता बिक्रम मजीठिया को दिया जा सकता है, क्योंकि सदन के अंदर जिस तरह की आक्रामकता बिक्रम मजीठिया दिखाते हैं, वह ढींडसा नहीं दिखा पाते। सदन में शिअद विधायकों की गिनती काफी कम है। ऐसे में पार्टी को किसी ऐसे नेता की जरूरत थी, जो आक्रामकता से सरकार पर भारी पड़ सके, लेकिन अकाली दल ने इन सभी बिंदुओं को दरकिनार करते हुए आम लोगों में अपनी बिगड़ी हुई छवि को सुधारने के लिए परमिंदर ढींडसा जैसे नेता को आगे किया है।
दरअसल, शिरोमणि अकाली दल पर परिवारवाद का ठप्पा लगा हुआ है। इस छवि से निकलने के लिए पार्टी ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। एक तो उन्होंने परिवार से बाहर जाकर किसी को विधायक दल का नेता बनाया वहीं, दूसरी ओर सुखदेव सिंह ढींडसा जैसे नाराज नेता के बेटे को आगे करके उनकी नाराजगी को कम करने की कोशिश की है। हालांकि, पार्टी नेताओं का मानना है कि सदन में पार्टी की उपलब्धियां दिखाने का काम तो बिक्रम मजीठिया ही करेंगे।
मजीठिया ने ही रखा ढींडसा का नाम
सुखबीर बादल के सांसद बनने के बाद यह पद खाली चल रहा था। विधानसभा सत्र के बाद अकाली विधायक दल की मीटिंग हुई, जिसमें बिक्रम मजीठिया ने ढींडसा ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी ने सहमति से स्वीकार कर लिया। पार्टी ने अनुसूचित जाति बिरादरी को नुमाइंदगी देते हुए पवन टीनू को उपनेता बनाया तो हिंदू वर्ग से विधायक एनके शर्मा को चीफ व्हिप बनाया गया है।





