पटना में हादसा होने से बचा, यात्री ने कहा- लगा जैसे मौत से मिल जिंदा लौट आया

पटना.पटना एयरपोर्ट पर शुक्रवार को एक बड़ा विमान हादसा होने से बाल-बाल बच गया। पटना से दिल्ली जाने वाले इंडिगो के विमान 6 ई 508 के इंजन में उस वक्त आग लग गई जब वह रनवे के लगभग अंतिम टेक ऑफ प्वाइंट से उड़ान भरने ही वाला था। लेकिन, पायलट ने अपनी सूझ-बूझ से इमरजेंसी ब्रेक लगाया और इवैक्यूवेशन स्लाइड के जरिये सभी 174 यात्रियों को विमान से सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना के बाद पटना एयरपोर्ट पर तीन घंटे यानी शाम छह बजे शाम से रात नौ बजे तक ऑपरेशन बंद कर दिया गया।
पटना में हादसा होने से बचा, यात्री ने कहा- लगा जैसे मौत से मिल जिंदा लौट आया
ऐसे लगा जैसे मैं मौत से मिलकर जिंदा लौट आया
इंडिगो की फ्लाइट 6 ई 508 में मैं पटना से दिल्ली जाने के लिए सवार हुआ। वहां से मुझे गोवा जाना था। ठीक 5:50 बजे विमान पार्किंग से रनवे के लिए रवाना हुआ। रफ्तार पकड़ी और धोबी घाट की ओर गया। फिर विमान की स्पीड बढ़ी और फुलवारीशरीफ की तरफ टेकऑफ करने को आया। इसी बीच जोरदार आवाज सुनाई दी और इंजन में आग लग गई। पायलट ने जैसे ही इंजन में आग लगते देखी, इमरजेंसी ब्रेक लगा उसे फौरन बंद कर दिया। अगर पायलट इंजन बंद नहीं करता, तो फिर क्या होता, भगवान ही जानता है। पायलट चीखा-जल्दी भागो और निकलो विमान से। इतना सुनते ही मैं घबरा गया। देखते ही देखते चारों तरफ अफरातफरी मच गई। सामने सबको मौत नजर आ रही थी। कुछ यात्री बदहवास रोने-चीखने लगे। जैसे ही विमान के दरवाजे और छह स्केडिंग स्लाइड खुले, सभी यात्री उतरने की आपाधापी में एक-दूसरे पर चढ़ने लगे। उनमें जान बचाने की होड़ मची थी। उन्हें केबिन क्रू ने संभाला। मैं भी सामान छोड़कर भागा। बाहर आने के बाद ऐसा लगा जैसे मैं मौत से मिलकर जिंदा लौट आया। उतरने में मेरा बायां हाथ जख्मी हो गया। करीब 15 यात्रियों को भी चोटें लगीं। सबों की आंखों में खौफ का मंजर साफ झलक रहा था।

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विमान करीब 1000 मी. और आगे बढ़ता तो हो सकता था बड़ा हादसा
पटना में रनवे की लंबाई करीब 2072 मीटर है। विमान टेक ऑफ के लिए रनवे पर करीब 1072 मीटर रॉलिंग कर चुका था। विमान उड़ान भरता उसके पहले लेफ्ट इंजन का ब्लेड टूट गया। इस वजह से इंजन में आग लगी। अगर विमान 1000 मीटर और आगे बढ़ जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
 
पटना में पहली बार एेसा ऑपरेशन : क्रू मेंबर के साथ यात्री भी जुटे रेस्क्यू में
विमान में कुल 180 सीटें थीं। लेकिन 174 मुसाफिर सवार थे। उनकी देखभाल के लिए चार केबिन क्रू तैनात थे। इवैक्यूवेशन का फैसला लेते ही विमान को कुल तीन हिस्सों में बांट दिया गया। अगले हिस्से में स्थित दोनों दरवाजों की जिम्मेदारी दो केबिन क्रू ने संभाली वहीं विमान के पिछले हिस्से में स्थित दो दरवाजों की जिम्मेदारी दो अन्य केबिन क्रू ने संभाली। वहीं विमान के विंग के साथ स्थित दो दरवाजों की जिम्मेदारी इमरजेंसी गेट में बैठे मुसाफिरों को सौंप दी गई। कुछ ही सेंकेंड में विमान के छह दरवाजे और स्केडिंग स्लाइड खुल गए और मुसाफिरों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इस दौरान केबिन क्रू लगातार मुसाफिरों से चिल्लाकर कह रही थी कि वह अपना सामान छोड़ दें। कुछ मुसाफिर सामान लेकर विमान से बाहर जाने की कोशिश करने लगे। ऐसे मुसाफिरों का सामान छीन कर केबिन क्रू ने उन्हें बाहर कर दिया। पटना में पहली बार इस तरह इवैक्यूवेशन किया गया। रात एक बजे तक यात्री विमान उड़े, यह भी पहली बार हुआ।
 
एयरपोर्ट निदेशक बोले- इंजन फेल हो गया था इसलिए लगाना पड़ा ब्रेक
एयरपोर्ट के निदेशक आरएस लाहौरिया ने बताया कि इंडिगो विमान का इंजन-1 फेल्योर हो गया था। इसी वजह से इमरजेंसी ब्रेक लगाया गया। सभी यात्रियों को सुरक्षित विमान से उतारा गया। कुछ घंटे बाद विमान का परिचालन सामान्य हुआ।
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