पंजाब यूनिवर्सिटी की किन्नर स्टूडेंट ने जीत लिया मिस कानपुर का भी खिताब

चौदह वर्ष की उम्र में खुद के प्रति धारणा बदल गई। 17 साल की उम्र में धारणा के अनुसार लिंग परिवर्तन करा लिया और 21 साल की उम्र में मिस कानपुर का भी खिताब जीत लिया। यह सब कर दिखाया है पंजाब यूनिवर्सिटी की किन्नर स्टूडेंट विशीप्रीत ने। विशीप्रीत पीयू के फैशन एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की स्टूडेंट हैं। ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी करने के पीयू से ही एमएससी फैशन टेक्नोलॉजी कर रही हैं। 29 जून को कानपुर में हुए मिस कानपुर कांटेस्ट में विशीप्रीत ने भाग लिया और मिस खिताब को हासिल करके सभी को चौंका दिया। विशीप्रीत मनीमाजरा स्थित मंगलमुखी डेरे में रहती हैं। 
विशी ने बताया कि अगर कुछ करने की ललक और जुनून हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती है। असलियत के बाद परिवार ने भी नहीं दिया साथ विशीप्रीत का जन्म मलोया में हुआ था। 14 साल की उम्र में समझ आया कि पैदा लड़के के रूप में हुई हूं लेकिन मेरे शरीर की बनावट और मेरी सोच लड़की जैसी है। 17 साल की उम्र में जब लिंग परिवर्तन की बात अपने परिवार के सामने रखी तो उन्होंने घर से निकाल दिया। जिसके बाद जीवन को चलाने का जिम्मा खुद के ऊपर आ गया। किन्नर डेरे में जाकर रहने लगी और वहीं से पढ़ाई को भी जारी रखा।
प्रतियोगिता में भी करना पड़ा मुश्किलों का सामना
विशीप्रीत ने बताया कि अपनी दोस्त के साथ कांटेस्ट के लिए गई थी। हालांकि इसमें भाग लेने का कोई इरादा नहीं था। मैंने हंसी-मजाक में ही इसे शुरू किया लेकिन अंत में मुझे खिताब मिल गया। कांटेस्ट के लिए मुझे कुछ दिन वहां पर रहना पड़ा। वहां पर कुछ और भी किन्नर आए हुए थे। उनकी आदत ठीक वैसी थी जैसा हमारा समाज सोचता है। वह तालियां बजाकर हंसी-ठिठोली कर रहे थे। जिस पर मैंने उन्हें टोका कि हम यहां पर किन्नर के तौर पर कुछ करने नहीं आए बल्कि मिस कानपुर कांटेस्ट के लिए आए हैं। जिसके बाद कांटेस्ट में आए हुए अन्य किन्नरों ने मुझे खुद से अलग कर दिया।
अपनी पहचान के साथ हूं खुश
विशीप्रीत ने बताया कि मैं घर में लड़के के रूप में पैदा हुई। जब मैंने घरवालों को खुद के बारे में बताया तो उन्हें मुझे स्वीकार नहीं किया। जिसके कारण मैं मंगलमुखी डेरे में रह रही हूं लेकिन आज जो पहचान मुझे एक किन्नर के तौर पर मिल रही है, उससे बहुत खुश हूं।





