न अपील, न दलील, न वकील: अमेरिका में ट्रंप का महा-डिपोर्टेशन अभियान

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को देश से बाहर निकालने (डिपोर्टेशन) का एक बहुत बड़ा अभियान शुरू किया है। इस सख्त नीति की वजह से अमेरिका में बिना कानूनी दस्तावेजों के रह रहे करीब 18,000 भारतीय सीधे निशाने पर आ गए हैं। इस नए अभियान के तहत अमेरिकी जांच एजेंसी इमिग्रेशन कस्टम्स एंड एनफोर्समेंट (ICE) की टीमें लगातार छापे मार रही हैं।

अहम बात है कि इस बार नियम इतने सख्त हैं कि पकड़े गए प्रवासियों को कोर्ट में अपील करने का मौका नहीं मिल रहा है। अपनी बात रखने (दलील देने) की अनुमति नहीं है। यहां तक कि वकील करने का अधिकार भी नहीं दिया जा रहा है। पकड़े गए लोगों को सीधे डिटेंशन सेंटर में भेजा जा रहा है, जहां से प्रवासियों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें भी आ रही हैं।

सैन्य विमानों का इस्तेमाल और 16500 करोड़ का खर्च

मिली जानकारी के अनुसार ट्रंप प्रशासन इस बार प्रवासियों को वापस भेजने के लिए सैन्य विमानों का इस्तेमाल करने की तैयारी में है। प्रवासियों को रखने के लिए टेक्सास के ‘एल पासो’ और कैलिफोर्निया में बड़े-बड़े वेयरहाउस खरीदे गए हैं। इन सेंटर्स को बनाने में करीब 16,500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जहां फिलहाल 12,000 से ज्यादा प्रवासियों को रखा जा रहा है।

कानून के जानकारों की चिंता

न्यूयॉर्क के अनुभवी इमिग्रेशन वकील ग्रेग सिस्किंड का कहना है कि पिछले 30 सालों में उन्होंने ऐसा माहौल नहीं देखा। पहले हर प्रवासी को अपना पक्ष रखने का कानूनी अधिकार मिलता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में मानवाधिकारों के अपने नियम हैं, लेकिन केंद्रीय एजेंसी ICE इन सब को दरकिनार कर सीधे कार्रवाई कर रही है।

पिछले सालों के आंकड़े क्या कहते हैं?

गौरतलब है कि भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में कुल 3,567 भारतीयों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था। साल 2026 में जून तक 1,076 भारतीय वापस भेजे जा चुके हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि 5 फरवरी 2025 को अमेरिका ने एक सैन्य विमान से 104 भारतीयों को हथकड़ी और बेड़ियां पहनाकर अमृतसर भेजा था। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद भारत की संसद में भी काफी हंगामा हुआ था।

Back to top button