नियुक्तियों को ले कर एक बार फिर सवालों के घेरे में CSA कानपुर

जुबिली न्यूज ब्यूरो
कानपुर के चन्द्रशेखर आजाद कृषि एंव तकनीकि विश्विद्यालय का विवादों से नाता और भी गहराता जा रहा है , शासनादेशों को धता बताते रहने की परंपरा यहाँ बहुत मजबूती से जड़ जमा चुकी है। नियम विरुद्ध ढंग से उत्तर प्रदेश को लगातार वित्तीय चोट पहुँचाने के मामले अभी सामने आए ही थे कि एक बार फिर यह विश्वविद्यालय नियुक्तिय़ों में गड़बझाले को ले कर चर्चा में आ गया है।
विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों का आरोप है कि ताजा हुई नियुक्तियों में शासन के नियमों की खुल कर अवहेलना तो हुई ही साथ ही जिनकी नियुक्तियाँ की गई उसमें भी मनमानी की गई है।
सरकार द्वारा नौकरियों में सवर्ण जाति के लिए जिस 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई है उसका पालन नहीं हुआ। इतना ही नहीं 6 पदों के लिए जो भर्तियां हुई है उसमें 5 उम्मीदवार एक ही गांव, पोस्ट, तहसील और जिले के हैं।इतना ही नहीं इन पांचों उम्मीदवारों की जाति भी एक ही है।

आरोप है कि मिर्जापुर के इसी गांव के पास चन्द्रशेखर आजाद कृषि एंव तकनीकि विश्विद्यालय के वाइस चांसलर का भी गांव है। आरोप यह भी है कि ये पांचों उम्मीदवार उनकी जाति के हैं या उनके रिश्तेदार है। अब ये संयोग है तो बड़ा ही दिलचस्प संयोग है।
ऐसा नहीं है कि कानपुर का चन्द्रशेखर आजाद कृषि एंव तकनीकि विश्विद्यालय का नाम पहली बार इस तरह विवाद में सामने आया है। पहले भी इस तरह के कई आरोप लगते रह हैं। ऐस मामला साल 2019 को सामने आया था। 18 जून, 26 जून और 30 दिसंबर 2019 को बीजपी सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने शासन को पत्र लिखा था केवीके पर तैनात वैज्ञानिकों को मुख्यालय पर संबंध अथवा ट्रांसर नहीं किया जाएगा। लेकिन इसका पालन नहीं हुआ। इतना ही नहीं कुलपति ने केवीके के डॉ एके सिंह को मुख्यालय से संबंध कर अपर निदेशक प्रसार का प्रभार दे दिया जिनकी नियुक्ति 17 फरवरी 1994 को कुलाधिपति ने निरस्त कर दी थी।
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अनियमितताओं के ऐसे कई और मामले और भी आ चुके हैं। जिसमें ताजा विवाद 6 पदों की नियुक्ति को लेकर बढ़ गया है। सवाल है कि इस तरह की धांधली सामने आने के बाद शासन कराएगा या फिर विश्वविद्यालय में मजबूती से काबिज लोग बेखौफ हो कर अगली मनमानी में जुटे रहेंगे।
 

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