निजीकरण,नई शिक्षा नीति,पर्यावरण नीति पर राज्य हो एकजुट-भूपेश

रायपुर, 26 अगस्त।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश के संधीय ढ़ाचे को बचाए रखऩे के लिए सामूहिक लड़ाई पर जोर देते हुए सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण एवं नई शिक्षा नीति के खिलाफ लड़ाई के लिए राज्यों से एक साथ आने का आग्रह किया है।
श्री बघेल ने आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा गैर भाजपा शासित सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ आहूत वीडियो कान्फ्रेसिंग में केन्द्र सरकार की नई शिक्षा नीति को राज्यों के लिए बहुत ही घातक बताया साथ ही उद्योगों की स्थापना के लिए नया पर्यावरण कानून पर भी अपनी असहमति जताई।
उन्होने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ उत्पादक राज्य हैं। उत्पादक राज्यों को 2022 तक जीएसटी की क्षतिपूर्ति देने की बात थी। पिछले चार महीने से किसी भी राज्य को क्षतिपूर्ति का एक भी पैसा नही दिया गया है, जबकि आवश्यकता एवं परिस्थिति को देखते हुए जीएसटी क्षतिपूर्ति को 2027 तक किया जाना चाहिए।उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ को जीएसटी क्षतिपूर्ति के तहत 2828 करोड़ मिलना चाहिए था, नहीं मिला है। इस कारण दिनोदिन स्थिति भयावह होती जा रही है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चर्चा का उल्लेख करते हुए उन्होने कहा कि उद्योगों की स्थापना को लेकर पर्यावरण नीति बहुत भयावह है।उद्योग लग जाएं, उसके बाद वह सारे नियम कानून का पालन करेंगे, यह स्थिति ठीक नहीं है।उन्होंने कहा कि उद्योगों की स्थापना के संबंध में जो नया कानून बना है, वह बिल्कुल गलत है।
श्री बघेल ने कृषि मंडी के मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के रूख का समर्थन करते हुए कहा कि हमने भी इसका विरोध किया है।उन्होने कहा कि देश की किसी भी मंडी किसी भी राज्य का किसान अपने उत्पाद बेच सकता है। राज्यों को मंडी शुल्क लेने का अधिकार नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में 80 प्रतिशत लघु सीमांत किसान है। वे अपने फसल उत्पाद को बेचने के लिए पंजाब, हरियाणा नही जा सकते। वे अपनी फसलों को यही बेचेंगे। इसका लाभ बिचौलिए और व्यापारी उठाएंगे।
श्री बघेल ने कहा कि केन्द्र सरकार की नई शिक्षा नीति से वे सहमत नहीं है।इसके लिए राष्ट्रपति के पास जाना पड़े, प्रधानमंत्री के पास जाना पड़े, अदालत जाना पड़े, हमे जाना चाहिए। जो शिक्षा नीति लाए हैं, राज्यों के लिए बहुत ही घातक है।उन्होने कहा कि पहली से लेकर पांचवीं तक प्राइमरी तक की शिक्षा की व्यवस्था है। नई शिक्षा नीति में तीन क्लास उसके पहले और जोड़ दिए गए हैं।आंगनबाड़ी को जोड़ा गया है। ऐसे में इन्फ्रॉस्ट्रक्चर कैसे होगा। शिक्षकों की भर्ती कैसी होगी। भारत सरकार ने इस मामले में कुछ भी नही कहा है।उन्होंने कहा कि पूरी नीति भ्रामक है।
उन्होने झारखंड के मुख्यमंत्री श्री सोरेन की चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में निजीकरण चल रहा है।जितने भी सार्वजनिक उपक्रम है, उनको भारत सरकार एक-एक कर बेचते जा रही है।केरल से लेकर जम्मू कश्मीर तक सार्वजनिक उपक्रम बेचे जा रहे हैं। इसका कही-कही विरोध भी हो रहा है। हमें भी लड़ाई लड़नी होनी। उन्होंने कहा कि बस्तर के नगरनार में स्टील प्लांट का निर्माण अभी हो रहा है। यह प्लांट बना नही है और इसको बेचने की सूची में रख दिया गया है।
श्री बघेल ने आगे कहा कि हमें देश के संघीय को बनाए रखने की सामूहिक लड़ाई लड़नी होगी। स्व.श्रीमती इंदिरा गांधी के कार्यकाल में बैंकों को आम जनता के लिए खोला गया था, अब बैंक बंद हो रहे हैं। बैंक बड़े लोगों के लिए रह जाएंगे। आर्थिक मुद्दों से ध्यान हटाने की पुरजोर कोशिश भारत सरकार कर रही है। उन्होने कहा कि नए टेक्स सिस्टम में बड़ा झोल है। इसमें बड़ी गड़बड़ी है। कम्प्यूटर के माध्यम से करदाताओं का चयन होगा। इसमें छोटे व्यापारी ही फसेंगे। यह टैक्स चोरी करने के लिए किया जा रहा है और इससे बड़े व्यापारियों एवं उद्योगपतियों को बचाने की योजना है।
उन्होंने कहा कि यदि  केन्द्र सरकार जीएसटी की क्षतिपूर्ति राशि राज्यों को नहीं दे सकती है तो उत्पादन पर टैक्स लगाने का अधिकार राज्यों को दिया जाना चाहिए।उन्होने केन्द्र सरकार द्वारा आईटी, सीबीआई, ईडी जैसी संस्थाओं के दुरूपयोग का भी मामला उठाया।
 

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