नारा शिखर सम्मेलन: आपसी मतभेदों को पीछे छोड़ जापान और दक्षिण कोरिया ने मिलाया हाथ

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग और जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने नारा, जापान में एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन आयोजित किया, जिसका उद्देश्य व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा (चीन और उत्तर कोरिया) और अमेरिका के साथ गठबंधन जैसे साझा मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना है। इस बारे में विस्तार से पढ़ें।

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग और जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने मंगलवार को पश्चिमी जापान के ऐतिहासिक शहर नारा में एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के लिए मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच अक्सर तनावपूर्ण रहने वाले संबंधों को सुधारना और चीन के साथ बढ़ते क्षेत्रीय विवादों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री ताकाइची के लिए यह शिखर सम्मेलन एक राजनीतिक जीत के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पद संभालने के बाद उनकी लोकप्रियता की रेटिंग मजबूत है, लेकिन संसद के केवल एक सदन में उनकी पार्टी का बहुमत होने के कारण ऐसी अटकलें हैं कि वह अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए जल्द ही चुनाव करा सकती हैं।

सांस्कृतिक जड़ों के जरिए कूटनीति यह बैठक ताकाइची के गृहनगर नारा में आयोजित की जा रही है, जो अपने हिरणों और सदियों पुराने बौद्ध मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। बुधवार को दोनों नेता होरयू मंदिर (Horyu Temple) का दौरा करेंगे, जिसकी इमारतें 7वीं या 8वीं शताब्दी की हैं। ये दुनिया की सबसे पुरानी जीवित लकड़ी की संरचनाएं मानी जाती हैं, जो कोरियाई प्रायद्वीप के माध्यम से जापान में बौद्ध धर्म के आगमन और प्राचीन सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक हैं।

चर्चा के प्रमुख मुद्दे और चुनौतियां
इस शिखर वार्ता के केंद्र में व्यापार, चीन और उत्तर कोरिया से जुड़ी चुनौतियां, और अमेरिका के साथ गठबंधन जैसे विषय शामिल हैं। दोनों ही देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रत्याशित कूटनीति और रक्षा खर्च बढ़ाने के अमेरिकी दबाव का सामना कर रहे हैं।

इस बैठक के दौरान कुछ महत्वपूर्ण कूटनीतिक बिन्दुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया-

चीन के साथ तनाव: ताकाइची ने ताइवान पर चीनी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, जिससे बीजिंग के साथ तनाव बढ़ गया है।

CPTPP और फुकुशिमा: राष्ट्रपति ली ने ‘ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप’ (CPTPP) में दक्षिण कोरिया की भागीदारी के लिए जापान का समर्थन मांगा है। इसके बदले में, दक्षिण कोरिया 2011 की फुकुशिमा परमाणु आपदा के बाद जापानी उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर सकता है।

मानवीय सहयोग: ऐतिहासिक विवादों से बचते हुए, दोनों नेता 1942 में एक समुद्री खदान दुर्घटना में मारे गए कोरियाई मजदूरों के अवशेषों को बरामद करने के लिए मानवीय सहयोग पर चर्चा कर सकते हैं।

भविष्य की ओर बढ़ता कदम
जापान की ओर से 1910 से 1945 तक कोरिया पर किए गए औपनिवेशिक शासन के कारण दोनों देशों के बीच संबंधों में ऐतिहासिक दरारें गहरी रही हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और चीन-अमेरिका प्रतिस्पर्धा जैसे साझा खतरों ने इन्हें करीब ला दिया है। राष्ट्रपति ली के अनुसार, सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए ‘गहरा आपसी विश्वास’ सबसे अनिवार्य तत्व है। यह कूटनीतिक प्रयास एक पुराने, दरार वाले बर्तन की मरम्मत करने जैसा है, जहां इतिहास की दरारें अब भी मौजूद हैं, लेकिन साझा चुनौतियों कारण उन्हें भविष्य के लिए फिर से जोड़ने की कोशिश कर रही है।

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