नयी शिक्षा नीति को मंजूरी, अगले शैक्षिक सत्र से शुरू होगा अमल

जुबिली न्यूज़ डेस्क
नई दिल्ली. केन्द्र सरकार ने नयी शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है. केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में जो नयी शिक्षा नीति तैयार हुई है उससे देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा.
नयी शिक्षा नीति की घोषणा केन्द्रीय मंत्रियों प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल निशंक ने संयुक्त रूप से की. सितम्बर-अक्टूबर से शुरू होने वाले नए शिक्षा सत्र में नयी शिक्षा नीति को लागू करने का प्रयास किया जाएगा.

प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल ने बताया कि शिक्षा नीति में बदलाव करते हुए सरकार ने विद्यार्थियों के लिए भाषा के विकल्प को बढ़ा दिया है. उन्होंने बताया कि क्योंकि बच्चे दो से आठ साल की उम्र में भाषाएं जल्दी सीख जाते हैं इसलिए उन्हें शुरुआत से ही स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ तीन अलग-अलग भाषाओं में शिक्षा देने का प्राविधान रखा गया है. नयी शिक्षा नीति में कक्षा छह से आठ तक दो साल का लैंग्वेज कोर्स भी कराया जाएगा.
नयी शिक्षा नीति में छात्रों के मानसिक विकास के साथ-साथ उनके शारीरिक विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा. फिजीकल एजुकेशन को ज़रूरी बनाया जाएगा. सभी छात्रों को खेल, मार्शल आर्ट्स, नृत्य और योग की शिक्षा भी दी जायेगी. नयी शिक्षा नीति के लिए जो पाठ्यक्रम तैयार किया गया है उसमें तीन साल से 18 उम्र के विद्यार्थियों के लिए 5+3+3+4 का डिजाइन तय किया गया है.
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प्रधानमन्त्री की अध्यक्षता में 34 साल के बाद नयी शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है. इस नीति का मकसद शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है. प्रकाश जावडेकर ने बताया कि इस नयी शिक्षा नीति को तैयार करने के लिए देश की ढाई लाख पंचायतों, 6600 ब्लाक और 676 जिलों में सलाह-मशविरा किया गया. इस नीति में यही व्यवस्था है कि अगर कोई छात्र एक कोर्स के बीच कोई दूसरा कोर्स करना चाहता है तो पहले कोर्स को कुछ समय के लिए ब्रेक भी कर सकता है. मौजूदा शिक्षा नीति 1986 में बनाई गई थी. 1992 में इसमें संशोधन किये गए थे.

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