नक्सली क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाने वाले ‘संत’ को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान

बेगूसराय। साहित्य, संस्कृति, सरोकार और औद्योगिक विकास के लिए देशभर में चर्चित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि बेगूसराय ने एक बार फिर कमाल कर दिया है। बेगूसराय के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाकर समाज को बदलने में लगे उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय खरमौली के प्रधानाध्यापक संत कुमार सहनी को स्पेशल कैटेगरी में राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान-2020 से सम्मानित किया जाएगा।

इस सम्मान के लिए देशभर से 157 शिक्षकों का चयन कर केेन्द्र को भेजा गया था। चयन समिति ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक कर विभिन्न तय मानकों की समीक्षा करते हुए 47 शिक्षकों का अंतिम रूप से चयन किया। जिसमें बिहार से दो शिक्षक, बेेगूसराय से उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय खरमौली के प्रधानाध्यापक संत कुमार सहनी तथा सारण जिला के मध्य विद्यालय चैनपुर बैसवारा के प्रधानाध्यापक अखिलेश्वर पाठक चयनित किए गए हैं। संत कुमार सहनी को यह सम्मान यूं ही नहीं दिया गया है, बल्कि इसके लिए उन्होंने 15 वर्षों तक कठिन साधना किया।

जिस गांव में लोग बच्चों को पढ़ाने नहीं भेजना चाहते थे। पढ़ने की उम्र में बच्चे कलम, कॉपी के बदले पिस्तौल और खेत में मशगूल रहा कहते थे। वहां हर घर में शिक्षा का अलख जग चुका है। 2004 में 123 बच्चे वाले इस विद्यालय में आज करीब 15 सौ बच्चे नामांकित हैं। जहां चार वर्गकक्ष था, वहां आज 30 वर्गकक्ष हैं। 2004 में प्राथमिक विद्यालय से मध्य विद्यालय में उत्क्रमण होने के बाद 2012 मध्य से माध्यमिक विद्यालय का दर्जा दिया गया। जहां बच्चे विद्यालय नहीं आना चाहते थे, वहां सामाजिक बदलाव आया तो प्रतिभा राष्ट्रीय स्तर पर निखर गई है।

मॉडल मेकिंग को लेकर 14 नवंबर 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गौतम बाल श्री सम्मान से सम्मानित किया। राज्य सरकार द्वारा विद्यालयों में बेहतर करने के लिए 2019 में शिक्षक दिवस के अवसर पर पटना में सबसे पहले संत कुमार सहनी को सम्मान दिया गया। दिव्यांगता के बाद भी समाज के सहयोग से संत कुमार सहनी द्वारा विद्यालय में मानव संसाधन विकास के लिए किए जा रहे प्रयास का असर है कि जिस विद्यालय का नाम पंचायत में लोग नहीं जानते थे, वह आज राज्य स्तर पर चर्चित है। 25 गांव के बच्चे यहां पढ़ने आ रहे हैं।

संत कुमार सहनी ने बताया कि समाजिक बदलाव, शिक्षकों और समाज के सहयोग से राष्ट्रीय पुरस्कार मिल रहा है। इस पुरस्कार ने जिम्मेवारी को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में विद्यालय में कई और बेहतरीन बदलाव करने हैं और हमेशा इसकी पहचान बनाए रखना ही उनका एकमात्र मूल मंत्र है।

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