‘नई विश्व व्यवस्था’ हेतु विश्व समाज के एकजुट होने का न्यायविदों ने किया आहृवान

‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 19वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ का घोषणापत्र जारी, ‘नई विश्व व्यवस्था’ गठन के संकल्प के साथ अन्तर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन सम्पन्न

लखनऊ : सिटी मोन्टेसरी स्कूल के तत्वावधान में आयोजित ‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 19वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ में पधारे 71 देशों के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, न्यायविद्, कानूनविद् व अन्य प्रख्यात हस्तियों ने ‘लखनऊ घोषणा पत्र’ के माध्यम से विश्व के सभी देशों का आह्वान किया है कि भावी पीढ़ी के हित में नई विश्व व्यवस्था बनाने हेतु एकजुट हों। सी.एम.एस. कानपुर रोड ऑडिटोरियम में चार दिनों तक चले इस महासम्मेलन के अन्तर्गत विश्व की प्रख्यात हस्तियों, न्यायविद्ों व कानूनविदों ने गहन चिन्तन, मनन व मन्थन के उपरान्त आज सर्वसम्मति से ‘‘लखनऊ घोषणा पत्र’’ जारी किया। इस घोषणा पत्र में न्यायविद्ों व कानूनविदों ने ‘प्रभावशाली विश्व व्यवस्था’ की जोरदार वकालत की। लखनऊ घोषणा पत्र जारी करने के अवसर पर होटल क्लार्क अवध में आयोजित एक प्रेस कान्फ्रेन्स में देश-दुनिया से पधारे इन कानूनविदों ने विस्तार से अपने विचार रखते हुए कहा कि भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य हेतु एक ‘नवीन विश्व व्यवस्था’ के गठन तक हमारा प्रयास निरन्तर जारी रहेगा।
इस घोषणा पत्र में विश्व के 71 देशों से पधारे न्यायविदों व कानूनविदों ने चार दिनों तक चले विचार-मंथन के निष्कर्ष को प्रस्तुत करते हुए विश्व एकता व शान्ति लाने के लिए शीघ्र ठोस कदम उठाने की आवश्यकता जोर दिया है। न्यायविदों ने आतंकवाद, परमाणु हथियार, ग्लोबल वार्मिंग आदि पर काबू पाने हेतु सामूहिक प्रयास पर जोर दिया है ताकि विश्व के ढाई अरब बच्चे व भावी पीढियां शान्ति व सुरक्षा के साथ रह सकें। लखनऊ घोषणा पत्र में मूलभूत अधिकारों, सभी धर्मो का आदर करने एवं विद्यालयों में शान्ति व एकता की शिक्षा देने के लिए भी कहा गया है। प्रेस कान्फ्रेन्स में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विभिन्न देशों से पधारे न्यायविदों ने एक स्वर से कहा कि सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ द्वारा आयोजित यह मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन एक ऐतिहासिक सम्मेलन है, जिससे आगे की पीढियां अवश्य लाभान्वित होंगी। पत्रकारों से बातचीत करते हुए न्यायविदों ने संकल्प व्यक्त किया कि वे अपने देश जाकर अपनी सरकार के सहयोग से इस मुहिम को आगे बढायेंगे जिससे विश्व के सभी नागरिकों को नवीन विश्व व्यवस्था की सौगात मिल सके और प्रभावशाली विश्व व्यवस्था कायम हो सके।

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लखनऊ घोषणा पत्र का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:-

यह जानते हुए कि मानव जाति का बहुत बड़ा वर्ग मूलभूत मानवीय अधिकारों से वंचित हैं एवं अत्यन्त गरीबी की दशा में है तथा विश्व के करोड़ों बच्चे विभिन्न प्रकार के बाल दुर्व्यवहारों का शिकार हो रहे हैं, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, स्वच्छ जल, मकान एवं कपड़े आदि के मूलभूत अधिकारों से वंचित हैं। यह मानते हुए कि सतत विकास के लिए विश्व शान्ति अत्यन्त आवश्यक है, जिससे आज के वैश्विक युग में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लाभ गरीब और पिछड़े वर्ग तक पहुँच सके।
इस बात को समझते हुए कि यह शताब्दी नई समस्याओं के साथ ही धार्मिक व जातीय आकांक्षाओं पर आधारित लड़ाई-झगड़ों का सामना कर रही है, जिससे आतंकवाद व धर्मान्धता (मगजतमउपेउ) बढ़ रहा है एवं आम जनता, सम्पत्ति व प्रकृति के लिए खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही, राजनेताओं द्वारा परमाणु युद्ध के भय व तनाव ने स्थिति और खराब कर दी है।
यह मानते हुए कि संयुक्त राष्ट्र संघ अकेली बड़ी संस्था है, जो लोगों में शान्ति, सामाजिक उत्थान, मानवीय अधिकार, विकास, पर्यावरणीय समस्याओं, जलवायु परिवर्तन एवं अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रही है, किन्तु इसमें ठोस कार्य करने की क्षमता व अधिकारिता की कमी है जिससे आम सभा के निर्णयों को लागू किया जा सके।
अतः हम विश्व के 70 देशों के मुख्य न्यायाधीश व न्यायाधीश, जो 16 से 19 नवम्बर 2018 तक सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ, भारत द्वारा आयोजित, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 पर आधारित, ‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 19वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ में प्रतिभाग कर रहे हैं, आज पिछले सम्मेलनों में पारित संकल्पों पर दोबारा अपनी मुहर लगाते हुए, यह संकल्प लेते हैं:-

1. कि विश्व में व्याप्त तनाव, समस्याओं व अन्य मामलों की भयावहता को देखते हुए व इस सम्मेलन के प्रतिभागियों के सामूहिक इच्छा के चलते 2019 में जल्द से जल्द विश्व के सभी देशों के प्रमुखों व सरकारों के प्रमुखों की एक बैठक बुलाई जाए जो विभिन्न मुद्दों पर विचार करके एक विश्व संसद के गठन के लिए कार्य करे, जिसमें पर्याप्त देशों व लोगों का प्रतिभाग हो और जो एक प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय कानून की स्थापना करे तथा इस सम्बन्ध में देशों के प्रमुखों द्वारा पहल की जाए।
2. कि संयुक्त राष्ट्र संघ से आग्रह किया जाए कि वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 108-109 में दिए निर्देशों के अनुरूप उसका पुनरावलोकन करें ताकि संयुक्त राष्ट्र संघ को पूर्णतया लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्व पर आधारित व प्रभावकारी बनाया जा सके और इसके प्रभाव व गरिमा को सुदृढ किया जा सके।
3. कि संयुक्त राष्ट्र संघ से अनुरोध किया जाये कि राष्ट्राध्यक्षों तथा शासनाध्यक्षों के साथ उन सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करें, जिनसे आतंकवाद और अतिवाद में वृद्धि होती है और उस असहिष्णुता का समाधान खोजें जो कि धार्मिक व राजनैतिक मतभेदों के कारण उत्पन्न होती है एवं कानून का राज, मानवाधिकार तथा धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार सुनिश्चित करें।
4. कि संयुक्त राष्ट्र संघ से प्रार्थना की जाए कि वर्तमान में घातक परमाणु बमों के निर्माण वितरण व रख रखाव में खर्च की जा रही धनराशि व साधनों का उपयोग विकास कार्यों व मानवता के हित में किया जाए
5. कि शांति शिक्षा व सांस्कृतिक सूझबूझ की शिक्षा विश्व के सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से दी जाए क्योंकि यह शांतिपूर्ण भविष्य के लिए आवश्यक है।
6. यह भी संकल्प लेते हैं कि इस घोषणा पत्र को सभी देशों व सरकारों के प्रमुखों व मुख्य न्यायाधीशों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव को भेजा जाए तथा उनसे प्रार्थना की जाए उनकी ओर से जैसी जरूरत हो, जल्दी से जल्दी कदम उठाए जाएं।

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