दिल्ली: वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एम्स राज्यों को करेगा तैयार

राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य को लेकर सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन में वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ।
देश के अलग-अलग राज्यों में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। इस संबंध में एम्स दिल्ली ने प्रशिक्षण की शुरुआत की है। राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य को लेकर सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन में वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ।
सेंटर के प्रभारी और कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं। यह मास्टर ट्रेनर अपने जिलों में नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षित करेंगे। बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए प्रशिक्षित अधिकारी पर्यावरण, यातायात और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कार्य योजना तैयार करेंगे। चेस्ट क्लीनिक स्थापित किए जाएंगे।
दवाओं की मात्रा सुनिश्चित करने से लेकर वायु प्रदूषण संबंधी बीमारियों के उपचार को सुनिश्चित किया जाएगा। इस संबंध में पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा चुका है। इसमें अलग-अलग राज्य के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार और पंजाब के प्रतिनिधि शामिल हुए। एम्स प्रशिक्षण के लिए नोडल केंद्र बना है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण से निपटने को लेकर छह राज्यों में टीम दौरा कर चुकी है। मार्च महीने के आखिर तक 15 राज्यों को कवर किया जाना है। एम्स स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने में राज्यों की क्षमताओं को मजबूत करने और उन्हें तकनीकी सहायता देने की दिशा में काम कर रहा है।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के निदेशक डॉ. रंजन दास भी शामिल हुए। उन्होंने देश भर में वायु प्रदूषण से संबंधित स्वास्थ्य प्रभावों के लिए निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने के लिए एनपीसीसीएचएच और एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के बीच संयुक्त और समन्वित कार्रवाई की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं से केवल शमन उपायों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अनुकूलन क्षमताओं और स्वास्थ्य प्रणाली की तैयारी को मजबूत करने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। एनसीडीसी के अतिरिक्त निदेशक डॉ. आकाश और सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन की प्रमुख प्रोफेसर किरण भी कार्यक्रम शामिल हुईं।





