दिल्ली की टैक्सी लेकर एक्सप्रेस-वे पर 80 Km प्रतिघंटा से तेज नहीं चल सकेंगे

दिल्ली की टैक्सी लेकर आप एक्सप्रेसवे के रास्ते आगरा और जयपुर नब्बे मिनट या दो घंटे में तय नहीं कर पाएंगे। नई टैक्सी में 1 मई से स्पीड गवर्नर लगाने की अनिवार्यता के साथ पुराने टैक्सी में भी स्पीड गवर्नर लगाने की अनिवार्यता जल्द ही लागू करने की तैयारी दिल्ली परिवहन विभाग ने कर ली है। 1 अक्टूबर, 2015 के पहले से निर्मित या पंजीकृत सभी टैक्सी में स्पीड गवर्नर लगाने की अधिसूचना अगले महीने सितंबर के पहले पखवाड़े तक हो जाएगी। अभी जिन्हें प्रोविजनल फिटनेस मिल रही है, वो प्रति घंटा 80 किमी वाला स्पीड गवर्नर लगाने पर ही मिलेगी।
दिल्ली की टैक्सी लेकर एक्सप्रेस-वे पर 80 Km प्रतिघंटा से तेज नहीं चल सकेंगे
ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट धारकों के संगठन का कहना है कि टोल अधिक स्पीड का देंगे तो यात्री जल्दी पहुंचने के लिए निजी वाहन का इस्तेमाल करेंगे। दिल्ली से आगरा और दिल्ली से जयपुर समेत देश के ज्यादातर एक्सप्रेसवे पर टैक्सी या कार की स्पीड लिमिट 100-120 किमी प्रतिघंटा तय है। जबकि नई अधिसूचना के अनुसार 80 किमी प्रतिघंटा स्पीड डिवाइज लगाना होगा। वहीं निजी वाहन से जाते हैं तो 100 किमी प्रतिघंटा स्पीड से चला सकते हैं। ऐसा सड़क हादसों को की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से हो रहा है।

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कितना हो जाएगा फर्क

दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे 165 किमी लंबा है। तय गति से 90 मिनट में पहुंच सकते हैं, स्पीड गवर्नर 80 किमी वाला लगाए जाने से 2 घंटे 4 मिनट लगेंगे। इसी तरह से दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस वे 195 किमी है जिसे पूरा करने में करीब 2 घंटे तय गति से लगते हैं। स्पीड गवर्नर की अनिवार्यता के बाद 2 घंटे 30 मिनट लगेंगे। अभी गति सीमा का उल्लंघन करते हैं तो 120-130 किमी प्रतिघंटा भी टैक्सी एक्सप्रेस वे पर भगाते हैं लेकिन स्पीड गवर्नर लग जाने पर 80 किमी प्रतिघंटा से अधिक रफ्तार में टैक्सी नहीं चल पाएगी।

20 साल में दिल्ली से देशभर में स्पीड गवर्नर

दिल्ली में कॉमर्शियल वाहनों में स्पीड गवर्नन लगाने का पहला आदेश सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 1997 को दिया था जिसमें सभी लोकल परमिट वाले सभी हैवी व मीडियम वाहन और सामान ढोने वाले लाइट व्हीकल में 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार वाला स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य किया था। हालांकि लोकल टैक्सी या ऑल इंडिया टूरिस्ट टैक्सी या नेशनल परमिट वाले भारी यात्री या सामान ढोने वाले वाहनों पर भी लागू नहीं था।

एक्सपर्ट बोले- स्पीड लिमिट से चालकों को फायदा होगा

इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग की सीनियर फेलो एसपी सिंह का कहना है कि भारी माल वाहनों में स्पीड लिमिट 80 किमी प्रतिघंटा किए जाने का फायदा ही होगा। चालक तेज भगाकर टाइम नहीं बचा पाएंगे। वहीं दिल्ली कांट्रैक्ट एसोसिएशन के महासचिव हरीश सब्बरवाल कहते हैं कि सड़क परिवहन मंत्रालय और राज्य सरकार को चाहिए की समन्वय ये स्पीड लिमिट तय करें। एक तरफ बांबे-पुणे, हैदराबाद-पुणे और बेंगलुरु-मैसूर हाइवे पर स्पीड 100-120 किमी प्रतिघंटा की है तो दूसरी तरफ 80 किमी पर स्पीड लिमिट का डिवाइज क्यों?
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