दर्दनाक : शेल्टर होम से बाहर तक आती थीं मासूम बच्चियों की दर्दभरी चीखें
छोटी-छोटी बच्चियों की मासूम मुस्कराहट और शरारती अंदाज से पत्थर दिल इंसान भी पिघल जाता है। उनकी हरकतों से किसी के भी चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। जब बात अनाथ बच्चों की होती है तो यह संवेदना और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में अगर शेल्टर होम में रह रही बच्चियों के साथ कोई हैवानियत के साथ पेश आए तो यह नि:संदेह शर्मनाक है।
ऐसा ही हुआ द्वारका सेक्टर-23 थाना क्षेत्र में स्थित एक शेल्टर होम में। यहां कभी दिन में तो कभी रात में बच्चियों की दर्दभरी चीखें बाहर आती थीं, जिन्हें सुनकर लोग खुद ही शेल्टर होम की तरफ चल देते थे।
वे अंदर जाकर संचालिका से बात करते थे और बच्चों को ठीक ढंग से रखने की नसीहत देकर चले जाते थे। हालांकि, इस नसीहत का उन पर कभी असर नहीं हुआ और बच्चियों की चीख रोज सुनाई देती रही।
शेल्टर होम के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि बच्चियों को छोटी-छोटी गलतियों के लिए तरह-तरह की यातनाएं दी जाती थीं। कभी जख्म पर तो कभी निजी अंग में मिर्च पाउडर डाला जाता था। इससे बच्चियां दर्द से कराह उठती थीं। डंडे से पिटाई तो आम बात थी, लेकिन मजबूर बच्चियां सबकुछ सह रही थीं। साथ ही आपस में साथियों से दर्द साझा कर लेती थीं।
सहपाठी लाते थे खाना
बच्चियों के साथ पढ़ने वाले बच्चों ने बताया कि जरा सी गलती पर पिटाई करने के बाद उन्हें बिना खाना दिए ही स्कूल भेज दिया जाता था। यह बात जब बच्चों को पता चली तो वे उनके लिए अपने घरों से खाना लाने लगे। बच्चियों में शेल्टर होम संचालिका का इतना खौफ था कि वे स्कूल में अपने साथियों द्वारा लाए गए खाने को भी छिपकर खाती थीं।
शेल्टर होम परिसर में अगर कोई छोटी बच्ची टॉयलेट कर देती थी, तो लाठी डंडों से पीटने के बाद उसके निजी अंगों में मिर्च पाउडर डाला जाता था। शुक्रवार को भी इनके साथ मारपीट की गई थी। एक बच्ची का हाथ फूला हुआ था। दर्द से वह कराह रही थी।
दो महीने पहले ही नई बिल्डिंग में आया था
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह शेल्टर होम दो महीने पहले ही नई बिल्डिंग में आया है। पहले कॉलोनी के प्रवेश पर ही था। इस कारण लोगों को शेल्टर होम में बच्चियों से हो रही हैवानियत का पता नहीं चलता था। लेकिन, जब से नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया तब से लोगों को इनकी हैवानियत के बारे में पता चलने लगा।