तो ऐसे जीनी पड़ती है रोहिंग्या महिलाओं को अपनी जिन्दगी, कभी सेक्स तो कभी…

म्यांमार के रखाइन प्रांत से भगाए गये मुस्लिम जिन्हें रोहिंग्या भी कहा जाता है. अगर इनके बारे में कहा जाय कि, वर्तमान में ये दुनिया के सबसे बदनसीब लोग हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं होगा. अपनी भूमि से जान बचाकर दूसरी जगहों पर शरण पाए रोहिंग्याओं की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नही है.
डायचे वेल्ले की एक रिपोर्ट की माने तो म्यांमार से भाग कर बंगलादेश पहुंच रही रोहिंग्या महिलाओं की हालत इतनी ज्यादा बुरी है कि, उनमें से कुछ अपना पेट भरने के लिए देह व्यापार में उतरने को मजबूर हैं. बंगलादेश स्थित कॉक्स बाजार में रोहिंग्याओं की अच्छी खासी आबादी है.
म्यांमार से भागे रोहिंग्या मुस्लिमों ने बंगलादेश के कॉक्स बाजार में आजकल डेरा डाला हुआ है. बताया जाता है, 6 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी म्यांमार से भाग कर बांग्लादेश आये हैं. कुटुपालोंग के सबसे बड़े रोहिंग्या शिविर में सेक्स कारोबार पहले से ही उभार पर है.
रिपोर्ट की माने तो, बहुत से सेक्स वर्कर कई सालों से बांग्लादेश के शिविरों में रहते हैं लेकिन अचानक लाखों की तादाद में आई महिलाओँ और लड़कियों ने इस कारोबार को विस्तार दे दिया है. कम से कम 500 रोहिंग्या सेक्स वर्कर कुटुपालोंग में रहती हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर कैंप में कई सालों से रहती आ रही हैं. ये कैंप 1992 में बनाये गये थे. इन्हें कारोबार में उतारने वाले दलाल अपनी नजरें नये लोगों पर टिकाये हैं.
भयावह तथ्य यह है कि, रोहिंग्या शिविरों में देह बेचने को मजबूर बहुत सी सेक्स वर्कर बच्चियां हैं जिनमें से कुछ की उम्र 15 वर्ष से भी कम है और उन्हें दिन में एक बार से ज्यादा भोजन भी नहीं मिलता. वो स्कूल नहीं जातीं और यह काम अपने मां बाप से छिपा कर करती हैं.
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों का कहना है कि उनके पास इस बारे में आंकड़े नहीं हैं कि कैंप में कितने सेक्स वर्कर हैं. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या एजेंसी यूएनएफपी से लैंगिक हिंसा मामलों की विशेषज्ञ के रूप में जुड़ी सबा जरीव कहती हैं, “संख्या बता पाना मुश्किल है क्योंकि हम इस बारे में आंकड़े नहीं जुटाते कि शिविरों में कितने सेक्स वर्कर हैं.”

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