‘तेवर’ दिखा रहे चीन पर PM मोदी से बात करेंगे ओबामा

एजेंसी/अमेरिका के पूर्व विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स का कहना है कि भारत और अमेरिका दोनों ही देश इस कशमकश से गुजर रहे हैं कि एशिया में मुखर हो रहे चीन से कैसे रिश्ता बनाया जाए।• बर्न्स ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद अपने ठोस लोकतांत्रिक आधारों के चलते भारत और अमेरिका इस सदी में वैश्विक प्रभाव डालने के लिए बेहतरीन स्थिति में हो सकते हैं।
वॉशिंगटन
उन्होंने कहा कि चीन के व्यापक अंतरराष्ट्रीय वजन और प्रभाव के मद्देनजर कारोबार, वैश्विक आर्थिक स्थिरता और जलवायु परिवर्तन पर उसके साथ रिश्ता बनाने के सिवा दोनों देशों के पास और कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने अमेरिकी अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ में ‘संपादकीय’ लेख में कहा कि अमेरिका और भारत, वियतनाम, फिलीपीन्स और दक्षिण चीन सागर में स्परैटली और पारासेल द्वीपसमूह के दीगर दावेदारों पर चीन की दबंगई के समक्ष खड़ा होने की जरूरत समझते हैं।
बर्न्स ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद अपने ठोस लोकतांत्रिक आधारों के चलते भारत और अमेरिका इस सदी में वैश्विक प्रभाव डालने के लिए बेहतरीन स्थिति में हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को ‘एक वास्तविक विश्व शक्ति’ में रूपांतरित करने की मोदी की मुहिम ओबामा और उनके पूर्ववर्ती जॉर्ज बुश के लक्ष्य को प्रतिबिंबित करता है कि एक मजबूत भारत अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।





