तालिबान-अफगान : कतर में “ऐतिहासिक” शांति वार्ता कल से

जुबिली न्यूज डेस्क
कतर में शनिवार से तालिबान और अफगान के बीच शांति वार्ता शुरु होने जा रही है। उम्मीद जतायी जा रही है कि 19 सालों से हिंसाग्रस्त अफगान में शांति लाने में यह वार्ता मील का पत्थर साबित होगी।
करीब छह महीने की देरी के बाद आखिरकार तालिबान और अफगानिस्तान के बीच 12 सितंबर से दोहा में शांति वार्ता शुरू होने जा रही है। कतर में अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि तालिबान और अफगान सरकार के बीच शांति वार्ता दोहा में शुरू होगी।
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अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि यह शांति वार्ता अफगानिस्तान के 19 साल के युद्ध को खत्म करने और देश में शांति लाने के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
इस मामले में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने कहा है कि, “यह बातचीत अफगानिस्तान में चार दशकों से जारी युद्ध और रक्तपात को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। इस अवसर को गंवाना नहीं चाहिए।”
दरअसल तालिबान और अफगानिस्तान सरकार के बीच वार्ता को अमेरिका का समर्थन हासिल है। खुद विदेश मंत्री पोम्पेओ भी इस वार्ता में शामिल होने के लिए दोहा में हैं।
वहीं राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वह अमेरिकी सैनिकों को अंतहीन युद्ध से निकालना चाहते हैं और वह इसी वादे के साथ खुद को दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने की मांग भी कर रहे हैं। कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बातचीत अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता लाने के लिए बहुत अहम कदम है।

मार्च में होनी थी वार्ता
यह शांति वार्ता इस साल के मार्च महीने में होने की उम्मीद थी, पर सैकड़ों कट्टर तालिबान लड़ाकों और अफगान बंदियों की अदला-बदली के विवादों के कारण यह प्रक्रिया कई बार स्थगित कर दी गई। राष्ट्रीय सुलह परिषद (एचसीएनआर) के प्रमुख अब्दुल्ला अब्दुल्ला भी इस वार्ता में शामिल होने के लिए कतर पहुंच गए है।
अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने इस वार्ता पर ट्वीट किया, “एचसीएनआर को उम्मीद है कि लंबे इंतजार के बाद बातचीत से स्थायी शांति और स्थिरता आएगी और युद्ध का अंत होगा।”
करीब छह महीने की देरी से शांति वार्ता शुरू हो रही है। अफगान और तालिबान के बीच कैदियों की अदला-बदली के बाद यह संभव हो पाया है। तालिबान ने एक हजार अफगान सैनिक रिहा किए तो काबुल ने 5,000 तालिबानी लड़ाके छोड़े हैं।
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अमेरिकी चुनाव पर क्या पड़ेगा असर
अमेरिका में 3 नवंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव होना है। इस चुनाव में राष्ट्रपति ट्रंप अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। इसीलिए वह अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर जोर दे रहे हैं।
अमेरिकी दखल के बाद फरवरी में अफगानिस्तान और तालिबान के बीच समझौता हुआ। तब अफगानिस्तान में 12,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात थे। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी जारी है और वहां नवंबर तक 4,000 से कम सैनिक बचेंगे। ट्रंप को उम्मीद है कि अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी से अमेरिकी मतदाताओं में उनकी लोकप्रियता बढ़ेगी, जो लगभग दो दशकों से चल रहे इस मुद्दे से तंग आ चुके है।

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