ट्रंप के टैरिफ और बढ़ते व्यापारिक दबाब के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही भारत की सराहना

वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापारिक दबावों और अमेरिकी टैरिफ की चुनौती के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस व्यावहारिकता, दृढ़ता और दूरदर्शिता के साथ हालात को संभाला है, उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है।

प्रतिष्ठित पत्रिका ‘द इकोनामिस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए भारत की विकास यात्रा को मजबूती से आगे बढ़ाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वॉशिंगटन के टैरिफ से परेशान यूरोपीय नेताओं के लिए भारत का अनुभव एक सीख हो सकता है।

मोदी ने वैश्विक व्यापार दबावों को अवसर में बदला

प्रधानमंत्री मोदी ने संतुलित और चतुर रणनीति के जरिए न केवल बाहरी दबावों को झेला, बल्कि उन्हें घरेलू सुधारों को तेज करने का जरिया भी बनाया। अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद के बावजूद भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी ऐसे समझौते में जल्दबाजी नहीं करेगा, जिसका भविष्य में पछतावा हो।

द इकोनामिस्ट ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के चीन के साथ संबंधों में सुधार आया है, निवेश पर लगी पाबंदियां हटाई गई हैं और कई अहम व्यापार समझौते किए गए हैं। यूरोपीय संघ के साथ एक बड़े व्यापार समझौते की संभावना भी जताई गई है।

इससे वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों मजबूत हुए हैं। पीएम की सुधार नीति को व्यापक समर्थन रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय दबाव का इस्तेमाल देश के भीतर सुधारों को आगे बढ़ाने में किया। कर प्रणाली को सरल बनाया गया, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उदारीकरण किया गया और बिजली क्षेत्र को निजी व विदेशी निवेश के लिए खोला गया।

सबसे अहम कदम श्रम कानूनों में व्यापक सुधार रहा, जिससे विनिर्माण क्षेत्र को विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिली। आश्चर्यजनक रूप से इन सुधारों को जनता का व्यापक समर्थन मिला और विरोध अपेक्षाकृत कम रहा।

‘द इकोनॉमिस्ट’ ने भारत की रणनीति की सराहना की

दीर्घकालिक सुधारों पर अडिग रहे पीएम हालांकि रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि प्रधानमंत्री मोदी के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत कृषि सुधारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों से प्रभावित हुई थी, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने दीर्घकालिक सुधारों का रास्ता नहीं छोड़ा।

भारत को उभरती हुई महाशक्ति बताते हुए लेख में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के पीछे सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता, सुदृढ़ मैक्रोइकोनामिक नीति और वैश्विक परिस्थितियों से मिले अवसरों की अहम भूमिका है।

घरेलू सुधारों से भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई

पीएम मोदी ने चुना जोखिम उठाना अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत तक के टैरिफ, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और रुपये पर दबाव के बावजूद भारत की जीडीपी वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है।

तीसरी तिमाही तक 8.2 प्रतिशत की वृद्धि और वित्त वर्ष 2026 के लिए विकास दर अनुमान को 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत किया जाना भारत की आर्थिक क्षमता को दर्शाता है।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने तय कर लिया है कि अर्थव्यवस्था को रूपांतरित करने के जोखिम, पीछे छूट जाने के खतरे से कहीं कम हैं।

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