टैक्स सेविंग के साथ-साथ शानदार रिटर्न के लिए ELSS में करें निवेश

नई दिल्ली: आमतौर पर जनवरी से मार्च का समय टैक्स-सेविंग सीजन के नाम से जाना जाता है। हालांकि, यह सीजन आगामी साल के टैक्स सीजन से पहले दिसंबर में ही शुरू हो चुका है। म्यूचुअल फंड अडवाइजर्स के मुताबिक, लोगों ने टैक्स सेविंग और ELSS में INVESTMENT या टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड के बारे में पूछताछ शुरू कर दी है, क्योंकि आयकर की धारा 80सी के तहत टैक्स बेनिफिट का लाभ लेने के लिए प्रूफ ऑफ इन्वेस्टमेंट जमा करने की समय-सीमा नजदीक आ रही है।
इन्वेस्टोग्राफी की फाउंडर श्वेता जैन कहती हैं, ‘टैक्स-सेविंग के लिए लोगों ने प्रयास शुरू कर दिया है। जैसे-जैसे चालू वित्त वर्ष की समाप्ति नजदीक आएगी, लोगों द्वारा इस बारे में पूछताछ बढ़ेगी। पूछताछ करने वाले अधिकतर लोग वेतनभोगी तबके से होते हैं, क्योंकि उन्हें जनवरी के अंत में सेक्शन 80सी के तहत अपने नियोक्ता को प्रूफ ऑफ इन्वेस्टमेंट सौंपना होता है। इसी के आधार पर पूरे वित्त वर्ष के लिए उनके टैक्स बकाये का कैलकुलेशन होगा और उन्हें उनके वेतन से काटा जाएगा।’
अंतिम तिमाही में ईलएसएस की ताबड़तोड़ बिक्री
कुछ म्यूचुअल फंड अडवाइजर्स के मुताबिक, टैक्स बचाने के लिए अधिकतर टैक्सपेयर्स की नींद हर साल इसी समय खुलती है। इन्वेत्जा के सीईओ और फाउंडर शरद सिंह ने कहा, ‘हम हर वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में ईएलएसएस की खरीदारी में तेजी देखते हैं। निवेशकों को ईएलएसएस निवेश को पूरे साल अनुशासित तरीके से नियमित निवेश का जरिया के तौर पर देखना चाहिए, न कि साल के अंत में हड़बड़ाकर सीधे 1.5 लाख रुपये का निवेश करें।’
एम्फी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में ईएलएसएस का इन्फ्लो बढ़कर 9,881 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष की चारों तिमाहियों की तुलना में सर्वाधिक है। तीसरी तिमाही में ईएलएसएस में 4,812 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। दूसरी तिमाही में 4,173 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि पहली तिमाही में 3,426 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इसी तरह, वित्त वर्ष 2016-17 की जनवरी-मार्च तिमाही में ईलएसएस में निवेश सर्वाधिक 6,677 करोड़ रुपये रहा, जबकि तीसरी तिमाही में 3,305 करोड़ रुपये, दूसरी तिमाही में 2,391 करोड़ रुपये और पहली तिमाही में यह निवेश 2,251 करोड़ रुपये रहा।
हड़बड़ी में नहीं करें निवेश
अडवाइजर्स चेतावनी देते हुए कहते हैं कि जल्दबाजी में निवेश की अपनी कमियां हैं। हड़बड़ी में निवेशक गलत विकल्प का चयन कर बैठते हैं।
जैन कहते हैं, ‘हड़बड़ी में निवेश करने पर उन्हें विभिन्न उत्पादों के बीच अंतर करने का समय नहीं मिल पाता, इसलिए वे सही विकल्प का चयन नहीं कर पाते। उदाहरणस्वरूप, कुछ लोग हमसे ईएलएसएस से अलग निवेश के विभिन्न विकल्पों के बारे में या ईएलएसएस से जुड़े रिस्क के बारे में पूछते हैं, जबकि वे पहले निवेश कर चुके होते हैं। वे अंतिम समय में निवेश के बढ़िया विकल्प के बारे में जानकारी मांगते हैं। उन्हें अपने निवेश विकल्पों और बेहतर चुनाव की जानकारी नहीं होती।
वित्त वर्ष की शुरुआत से ही करें SIP
म्यूचुअल फंड अडवाइजर्स का कहना है कि वित्त वर्ष की शुरुआत ईएलएसएस में निवेश की शुरुआत का सबसे बढ़िया टाइम होता है और इसे अनुशासित तरीके से एसआईपी के जरिये जारी रखना चाहिए। इससे आपको जल्दबाजी में गलत विकल्प के चयन से निजात मिलती है और आपका तीन साल का लॉक-इन पीरियड भी जल्द पूरा हो जाता है। सिंह ने कहा, ‘इस बात को याद रखें कि ईएलएसएस में तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है। जितना जल्दी आप इसमें निवेश करते हैं, उतनी ही जल्दी आपका लॉक-इन पीरियड खत्म होता है।’





